आजम खां की रिहाई में आ सकती है अड़चन, ED की नई FIR से बढ़ी मुश्किलें

HIGHLIGHTS
- आजम खां और अब्दुल्ला की याचिकाओं पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
- दो पैन कार्ड रखने के मामले में ट्रायल कोर्ट की सजा को दी गई है चुनौती।
- 13 अक्तूबर की रात अजीमनगर थाने में ED ने नई FIR दर्ज कराई।
दो पैन कार्ड रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला चाहे जो भी आए, लेकिन फिलहाल सपा नेता आजम खां के लिए जेल से बाहर आना आसान नजर नहीं आ रहा है। कानून के जानकारों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से 13 अक्तूबर की रात अजीमनगर थाने में दर्ज कराई गई नई एफआईआर उनकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। इस मामले में यदि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है या हिरासत में लेती है, तो पैन कार्ड प्रकरण में राहत मिलने के बाद भी उनकी रिहाई संभव नहीं हो पाएगी।
सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाएं दाखिल की हैं। इन याचिकाओं के माध्यम से ट्रायल कोर्ट द्वारा दो पैन कार्ड रखने के मामले में सुनाई गई सजा को चुनौती दी गई है। दोनों ने याचिकाओं का अंतिम निस्तारण होने तक अंतरिम राहत देने की मांग भी की है। सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसे लेकर समर्थकों और विरोधियों के बीच अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
इस मामले में बार एसोसिएशन रामपुर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह का कहना है कि यदि किसी आरोपी को एक मामले में जमानत मिल जाती है, लेकिन वह किसी दूसरे मामले में गिरफ्तार है या न्यायिक हिरासत में है, तो उसे जेल में रहना पड़ सकता है। हालांकि, केवल एफआईआर दर्ज होने से आरोपी की रिहाई अपने आप नहीं रुकती। नए मामले में गिरफ्तारी होने और अदालत से हिरासत की मंजूरी मिलने पर आरोपी को उस मामले में भी जमानत या दूसरी कानूनी राहत लेनी पड़ सकती है।
आजम खां के मामले में भी ईडी से जुड़े नए मुकदमे का प्रभाव इन्हीं कानूनी परिस्थितियों के आधार पर तय होगा। ऐसे में उनकी रिहाई को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के साथ-साथ ईडी की कार्रवाई भी अहम मानी जा रही है। फिलहाल आजम खां रामपुर जेल में बंद हैं।
चुनाव को प्रभावित करने की साजिश का आरोप
इस मामले को लेकर आरोप लगाया गया है कि केंद्र में 2014 और उत्तर प्रदेश में 2017 में भाजपा की सरकार बनने से पहले ही जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण पूरा हो चुका था। यदि इसमें कोई गड़बड़ी थी, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? करीब 12 साल बाद अब कार्रवाई की जा रही है। आरोप है कि ईडी की ओर से नया मुकदमा दर्ज कराया जाना सपा नेता को विधानसभा चुनाव से दूर रखने की कोशिश का हिस्सा है।
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