बंगाल: इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने से 6 एयरपोर्ट बंद, 300 उड़ानें प्रभावित

HIGHLIGHTS
- ज्वालामुखी में शुक्रवार से गतिविधियां बढ़ रही थीं।
- विस्फोट करीब 30 सेकंड तक जारी रहा।
- कैमरे में ज्वालामुखी से लावा निकलते हुए भी नजर आया।
इंडोनेशिया के सुंडा जलडमरूमध्य में मौजूद अनक क्राकाटोआ ज्वालामुखी रविवार तड़के फट गया। विस्फोट के बाद ज्वालामुखी से निकली राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कई इलाकों तक फैल गई। राख के चलते जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे समेत कई अन्य एयरपोर्ट के हवाई क्षेत्र को बंद करना पड़ा। यह ज्वालामुखी जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच स्थित है। भूवैज्ञानिक एजेंसी के मुताबिक, शुक्रवार से ही ज्वालामुखी में गतिविधियां बढ़ रही थीं। रविवार सुबह 3 बजकर 53 मिनट पर करीब 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ। कैमरे में ज्वालामुखी से लावा निकलते हुए भी देखा गया।
कितनी उड़ानें और कितने यात्री प्रभावित हुए?
रविवार दोपहर तक एयरपोर्ट और हवाई क्षेत्र बंद रहने की वजह से कुल 516 उड़ान गतिविधियां प्रभावित हुईं। इनमें जकार्ता के सोएकार्नो-हत्ता एयरपोर्ट की 202 उड़ानें शामिल थीं, जिससे करीब 22,800 यात्री प्रभावित हुए।
एयरपोर्ट को कम से कम शाम 5:30 बजे तक बंद रखने का आदेश दिया गया था। जकार्ता के हलीम परदानाकुसुमा एयरपोर्ट के साथ लांपुंग के रादिन इंतेन द्वितीय एयरपोर्ट समेत चार अन्य एयरपोर्ट भी प्रभावित हुए।
राख के बाद कितना बड़ा खतरा मंडरा रहा है?
इंडोनेशिया की ज्वालामुखी एजेंसी और डार्विन ज्वालामुखीय राख सलाह केंद्र ने उपग्रह तस्वीरों के जरिए राख के दो बड़े बादलों की पहचान की है। इनमें एक राख का गुबार करीब 20,000 फीट यानी 6,100 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचा और जकार्ता, बांतन तथा पश्चिमी जावा की दिशा में बढ़ा।
दूसरा राख का गुबार करीब 50,000 फीट यानी 15,200 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह बांतन, लांपुंग और बेंगकुलु के कुछ हिस्सों के अलावा सुंडा जलडमरूमध्य तथा सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों तक फैल गया।
अधिकारियों के अनुसार, मुख्य खतरे में ज्वालामुखीय राख, जहरीली गैस की अधिक मात्रा और गर्म पत्थरों का बाहर निकलना शामिल है।
क्या अनक क्राकाटोआ अभी भी सक्रिय है?
भूवैज्ञानिक एजेंसी की प्रमुख लाना सारिया ने बताया कि जुलाई से अनक क्राकाटोआ में गतिविधियां बढ़ी हैं और रविवार को हुआ विस्फोट मौजूदा गतिविधि के दौर का सबसे शक्तिशाली विस्फोट रहा। उनके मुताबिक, लगातार हो रहे विस्फोट संकेत दे रहे हैं कि ज्वालामुखी के नीचे मैग्मा और ज्वालामुखीय गैसों की आपूर्ति जारी है। हालांकि, अधिकारी फिलहाल यह अनुमान नहीं लगा सकते कि आगे कोई बड़ा विस्फोट होगा या नहीं।
उन्होंने कहा कि ज्वालामुखी की स्थिति का आकलन केवल विस्फोटों की संख्या या राख के गुबार की ऊंचाई के आधार पर नहीं किया जा रहा है, बल्कि सभी निगरानी आंकड़ों को ध्यान में रखा जा रहा है। फिलहाल किसी की मौत की सूचना नहीं है और लोगों को निकासी का आदेश भी नहीं दिया गया है। अधिकारियों ने लोगों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम तीन किलोमीटर दूर रहने की चेतावनी दी है।
क्राकाटोआ का इतिहास इतना डरावना क्यों है?
अनक क्राकाटोआ का मतलब क्राकाटोआ का बच्चा है। यह उसी प्रसिद्ध क्राकाटोआ ज्वालामुखी से जुड़ा है, जिसके 1883 में हुए बड़े विस्फोट का असर दुनिया के मौसम पर भी पड़ा था और वैश्विक स्तर पर ठंड बढ़ने का दौर आया था।
वर्ष 2018 में अनक क्राकाटोआ की गतिविधि के कारण सुनामी आई थी। इस घटना में सुमात्रा और जावा में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ज्वालामुखीय गतिविधि के चलते समुद्र के भीतर भूस्खलन हुआ था और अनक क्राकाटोआ का दक्षिण-पश्चिमी हिस्सा ढह गया था। इससे बड़ी मात्रा में पानी विस्थापित हुआ और सुनामी पैदा हुई।
इस घटना के बाद वैज्ञानिकों के अनुसार अनक क्राकाटोआ द्वीप अपने पुराने आकार का करीब एक-चौथाई रह गया था।
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