बरेली में धरने पर बैठे सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, निलंबन को बताया साजिश

बरेली। यूजीसी से जुड़े विवाद और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सार्वजनिक इस्तीफा देने के बाद पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मंगलवार को वे बरेली डीएम कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और अपनी निलंबन कार्रवाई को एक “पूर्व नियोजित साजिश” करार दिया।
अलंकार अग्निहोत्री ने मांग की कि जिलाधिकारी स्वयं सामने आकर यह स्पष्ट करें कि सोमवार शाम किस अधिकारी का फोन आया था, जिसमें कथित तौर पर ब्राह्मणों के लिए अपशब्द कहे गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि डीएम सामने नहीं आते, तो प्रधानमंत्री या केंद्रीय गृहमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।
शासन ने किया निलंबित, मंडलायुक्त को सौंपी जांच
प्रदेश सरकार ने नगर मजिस्ट्रेट पद पर तैनात अलंकार अग्निहोत्री को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।
विशेष सचिव अन्नपूर्णा गर्ग द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि मामले की विभागीय जांच की जिम्मेदारी मंडलायुक्त बरेली भूपेंद्र एस. चौधरी को सौंपी गई है। निलंबन अवधि के दौरान अलंकार अग्निहोत्री को शामली जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
‘बंधक बनाए जाने’ के आरोपों से प्रशासन ने किया इनकार
अलंकार अग्निहोत्री द्वारा लगाए गए उस आरोप को भी प्रशासन ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि डीएम के कैंप कार्यालय में उन्हें करीब 45 मिनट तक “बंधक” बनाकर रखा गया।
इस पर एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने स्पष्ट किया कि वहां किसी तरह की जबरन रोकने की स्थिति नहीं थी। उन्होंने बताया कि अलंकार स्वयं अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे, जहां एडीएम सिटी और एडीएम प्रशासन भी मौजूद थे। बातचीत के बाद वे स्वयं वहां से चले गए।
एडीएम ने कहा कि उन्हें अवकाश लेने का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। प्रशासन के अनुसार, लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं।
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