सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से मांगा जवाब, कमेटी से जुर्माना वसूली पर लगाई रोक

HIGHLIGHTS
- मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी।
- न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनाया फैसला।
- मार्च 2025 में शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की थी।
- विवादित ढांचा कलेक्ट्रेट की 315 वर्ग मीटर जमीन पर बना था।
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्तूबर को होगी। हाईकोर्ट ने नगर मजिस्ट्रेट के उस आदेश पर भी अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें छह करोड़ 41 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति मस्जिद कमेटी से वसूलने का निर्देश दिया गया था। यह फैसला न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनाया।
क्या है पूरा मामला
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित विवादित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला सरकारी जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जे और अदालत के फैसलों से जुड़ा है। मार्च 2025 में बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मामले में कार्रवाई शुरू की थी। जांच में कलेक्ट्रेट की 315 वर्ग मीटर जमीन (खसरा संख्या 539) पर बने ढांचे को अवैध बताया गया था।
प्रशासन के मुताबिक, यह जमीन परिसर की पुरानी विश्रामशाला की थी, जिसे बिना अनुमति धार्मिक ढांचे में तब्दील किया गया। वहीं, मस्जिद कमेटी का दावा था कि यह 100 साल से अधिक पुरानी संपत्ति है और वक्फ में दर्ज है।
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ढांचे को बेदखल करने का आदेश दिया था। इसके साथ ही भारी जुर्माना भी लगाया गया था। सिटी मजिस्ट्रेट के इस फैसले के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की। हालांकि, 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने याचिका खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को बरकरार रखा।
पांच सितंबर को ध्वस्त कर दी गई थी मस्जिद
जिला अदालत के फैसले के बाद 5 सितंबर 2026 की देर रात से 6 सितंबर की तड़के के बीच प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के सभी मुख्य द्वार सील कर दिए। मौके पर भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया और बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।
ध्वस्तीकरण के तुरंत बाद मस्जिद कमेटी ने कार्रवाई को अवैध बताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। कमेटी ने आरोप लगाया कि पर्याप्त नोटिस दिए बिना कार्रवाई की गई। इसी मामले में 11 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने यूपी सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा। साथ ही मस्जिद कमेटी से जुर्माने की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी।
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