फर्जी CBI अधिकारी और जज बनकर साइबर ठगों ने कर्नल से ठगे 9 लाख रुपये

HIGHLIGHTS
- नोएडा में रिटायर्ड कर्नल को साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाकर दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा।
- फर्जी सीबीआई अधिकारी और जज बनकर ऑनलाइन सुनवाई का नाटक किया और 9 लाख रुपये आरबीआई खाते में जमा कराने के नाम पर ठग लिए।
- परिजनों की सतर्कता से ठगी का खुलासा हुआ, साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
नोएडा। साइबर ठगों ने सेक्टर-37 निवासी एक सेवानिवृत्त कर्नल को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने का डर दिखाकर दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी और जज बताकर ऑनलाइन कोर्ट की सुनवाई का नाटक किया और गिरफ्तारी का भय पैदा कर कर्नल से करीब 9 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
दो दिन तक कमरे से बाहर नहीं निकलने पर जब परिजनों को शक हुआ और उन्होंने कर्नल से बातचीत की, तब पूरे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
सीबीआई केस और गिरफ्तारी का डर दिखाया
जानकारी के अनुसार, सेक्टर-37 निवासी सेवानिवृत्त कर्नल विजय के पास 20 मई की सुबह एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर मुंबई में केनरा बैंक में खाता खोला गया है और उस खाते से अवैध लेनदेन हुआ है।
कॉल करने वाले ने कर्नल पर मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज होने की बात कही। शुरुआत में उन्होंने इस आरोप को गलत बताते हुए फोन काट दिया, लेकिन ठगों ने दोबारा कॉल कर गिरफ्तारी की धमकी दी। इसके बाद उन्हें विश्वास दिलाने के लिए फर्जी वारंट भी भेजा गया।
ऑनलाइन सुनवाई का रचा पूरा खेल
ठगों ने कर्नल को जांच में सहयोग करने के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उन्हें किसी भी व्यक्ति से मामले की जानकारी साझा नहीं करने की हिदायत दी गई।
इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए पूछताछ शुरू की गई। आरोपियों ने खुद को वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी और न्यायाधीश बताकर ऑनलाइन सुनवाई की। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक उनकी रकम की जांच की जाएगी और अगर पैसा मामले से जुड़ा नहीं मिला तो वापस कर दिया जाएगा।
आरबीआई खाते में जमा कराने के नाम पर ठगी
ठगों ने कर्नल को बताया कि उनकी जमा पूंजी को आरबीआई के सिक्योरिटी अकाउंट में ट्रांसफर करना होगा। उनकी बातों में आकर कर्नल ने 22 मई तक अलग-अलग खातों में करीब 9 लाख रुपये जमा कर दिए।
जब तय समय के बाद रकम वापस नहीं आई तो उन्हें शक हुआ। इसी दौरान परिजनों ने बातचीत कर पूरी स्थिति समझी और साइबर ठगी का पता चला। इसके बाद उन्होंने आगे पैसे देने से इनकार कर दिया और साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
बैंक खातों और आरोपियों की जांच शुरू
डीसीपी साइबर सुरक्षा शैव्या गोयल ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटा रही है।
पुलिस का कहना है कि लोगों को ऐसे फर्जी कॉल, वीडियो कॉल और गिरफ्तारी के डर से बचने की जरूरत है। किसी भी जांच एजेंसी के नाम पर पैसे मांगने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को देनी चाहिए।
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