ग्रेटर नोएडा: प्रियंका की मौत के बाद गांव में पसरा मातम, दहेज उत्पीड़न के आरोपों की जांच जारी

HIGHLIGHTS
- ग्रेटर नोएडा की शिक्षिका प्रियंका की मौत के बाद पैतृक गांव सादोपुर में मातम छा गया, गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया।
- मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और लगातार प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं।
- परिवार के अनुसार पहले भी दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई गई थी, मामले की जांच जारी है।
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा की प्रियंका की मौत के बाद उसका शव जब पैतृक गांव सादोपुर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। बेटी का शव देखकर परिजन बेसुध हो गए, वहीं ग्रामीण और रिश्तेदार भी भावुक हो उठे। गमगीन माहौल के बीच सादोपुर स्थित अंत्येष्टि स्थल पर प्रियंका का अंतिम संस्कार किया गया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।
प्रियंका कंप्यूटर साइंस में बीटेक करने के बाद बीएड की पढ़ाई पूरी कर चुकी थीं और दिल्ली के एक निजी स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं।
शादी के बाद से उत्पीड़न का आरोप
प्रियंका के भाई नितिन के अनुसार, उनकी बहन की शादी 8 फरवरी 2023 को मनीष भाटी से हुई थी। आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज को लेकर उसे परेशान किया जाने लगा।
परिवार का कहना है कि करीब एक साल पहले प्रताड़ना से परेशान होकर प्रियंका और मायके पक्ष ने दिल्ली के विनोद नगर थाने में दहेज उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद प्रियंका कुछ समय तक अपने मायके में रही थीं।
पंचायत के बाद भेजा गया था ससुराल
परिजनों के मुताबिक, दोनों परिवारों के बीच पंचायत हुई थी। इसमें पति और ससुराल पक्ष के लोगों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी थी। इसके बाद परिवार के समझाने पर प्रियंका को दोबारा ससुराल भेज दिया गया था।
परिजनों का आरोप है कि कुछ समय तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन बाद में फिर से दहेज की मांग को लेकर प्रियंका को परेशान किया जाने लगा।
शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार से थीं प्रियंका
प्रियंका का परिवार शिक्षा और सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पहचान रखता है। उनके पिता अजीत बैसोया टकसाल से सेवानिवृत्त हैं। भाई नितिन एटीएस में कार्यरत हैं, जबकि दूसरे भाई मनीष प्रोफेसर हैं। उनकी बड़ी बहन नीतू दिल्ली पुलिस में उपनिरीक्षक के पद पर तैनात हैं।
परिवार के बुजुर्ग सदस्य चौधरी केशराम बैसोया भी दिल्ली पुलिस में उपनिरीक्षक रहे थे। सेवा काल के दौरान वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा अधिकारी (PSO) के रूप में भी तैनात रहे थे। पिछले महीने उनका निधन हुआ था।
मामले में पुलिस की जांच जारी है। आरोपों और घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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