हिंगोली में 24 घंटे में तीसरी बार कांपी धरती, 2.5 तीव्रता का भूकंप दर्ज

HIGHLIGHTS
- भूकंप का केंद्र सिद्धेश्वर और दुधाला गांवों के बीच बताया गया।
- शनिवार सुबह भी जिले में दो भूकंपीय झटके आए थे।
- पहला शनिवार सुबह 7:46 बजे 3.3 तीव्रता का था।
हिंगोली। महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में रविवार दोपहर भूकंप का झटका महसूस किया गया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.5 दर्ज की गई। पिछले 24 घंटे के दौरान जिले में यह तीसरा भूकंपीय झटका है। लगातार आ रहे झटकों से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। हालांकि, अब तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है।
अधिकारी के अनुसार, रविवार दोपहर 1:31 बजे भूकंप दर्ज हुआ। इसका केंद्र औंढा नागनाथ तहसील के सिद्धेश्वर और दुधाला गांवों के बीच बताया गया है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
शनिवार को भी महसूस किए गए दो झटके
इससे पहले शनिवार सुबह हिंगोली जिले में कुछ घंटों के अंतराल पर दो भूकंपीय झटके महसूस किए गए थे। पहला झटका सुबह करीब 7:46 बजे दर्ज हुआ था। इसकी तीव्रता 3.3 थी और केंद्र औंढा नागनाथ तहसील के गढ़ाला गांव में जमीन से करीब 7 किलोमीटर की गहराई में था।
इसके करीब दो घंटे बाद 4.5 तीव्रता का एक और तेज झटका महसूस किया गया। जिले के कई हिस्सों में इसका असर महसूस हुआ। भूकंप के दौरान कुछ इलाकों में तेज गड़गड़ाहट की आवाज भी सुनाई दी।
छह साल से जारी है भूकंपीय गतिविधि
हिंगोली के इस क्षेत्र में करीब छह साल से रुक-रुककर भूकंपीय गतिविधियां दर्ज की जा रही हैं। इससे पहले 1 अक्टूबर को आसपास के पांगरा शिंदे गांव में भी गड़गड़ाहट की आवाज के साथ भूकंपीय गतिविधि महसूस हुई थी।
इस साल 9 और 11 जुलाई को भी क्षेत्र में 4.6 और 3.5 तीव्रता के भूकंप के झटके दर्ज किए गए थे। इन झटकों के कारण कुछ घरों में दरारें आने की बात सामने आई थी। फिलहाल रविवार को आए 2.5 तीव्रता के झटके के बाद प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
भूकंप के दौरान क्या करें
भूकंप के दौरान जितना संभव हो सके, सुरक्षित रहने की कोशिश करें। इस बात को लेकर सतर्क रहें कि कौन-से भूकंपीय झटके पूर्व-चेतावनी देने वाले हो सकते हैं और बाद में बड़ा भूकंप भी आ सकता है। सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए केवल उतनी ही हलचल करें जितनी जरूरी हो। झटके रुकने के बाद घर में तब तक रहें, जब तक यह सुनिश्चित न हो जाए कि बाहर निकलना सुरक्षित है।
यदि आप घर के अंदर हों
- जमीन पर झुक जाएं और किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे शरण लें। भूकंप के झटके रुकने तक उसे मजबूती से पकड़े रहें।
- यदि मेज या डेस्क उपलब्ध न हो तो अपने चेहरे और सिर को बाजुओं से ढककर बिल्डिंग के किसी कोने में झुककर बैठें।
- किसी आंतरिक दरवाजे के लेंटर, कमरे के कोने, मेज या पलंग के नीचे रुककर खुद को सुरक्षित रखें।
- शीशे, खिड़कियों, दरवाजों और दीवारों से दूर रहें। लाइटिंग फिक्सचर्स या फर्नीचर जैसी गिर सकने वाली वस्तुओं से भी दूरी बनाए रखें।
यदि आप घर के बाहर हों
- जहां हैं, वहीं रहें और बिल्डिंग, पेड़ों, स्ट्रीट लाइटों तथा बिजली या टेलीफोन की तारों से दूर रहें।
- यदि आप खुले स्थान पर हैं तो भूकंप के झटके रुकने तक वहीं रहें।
- सबसे अधिक खतरा बिल्डिंग के बाहर, निकास द्वारों और बाहरी दीवारों के पास होता है। भूकंप से होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं दीवारों के गिरने, टूटकर गिरने वाले कांच और गिरने वाली वस्तुओं के कारण होती हैं।
यदि आप चलते वाहन में हों
- जितनी जल्दी संभव हो, सुरक्षित तरीके से वाहन रोकें और उसी में रुके रहें। बिल्डिंग, पेड़, ओवरपास तथा बिजली या टेलीफोन की तारों के पास या नीचे वाहन रोकने से बचें।
- भूकंप के झटके रुकने के बाद सावधानी से आगे बढ़ें। उन सड़कों, पुलों और रैंप से बचें जो भूकंप के कारण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
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