पंजाब के 53 आम आदमी क्लीनिक बंद, डॉक्टरों और कर्मचारियों ने शुरू की हड़ताल

HIGHLIGHTS
- आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट पंजाब के आह्वान पर हड़ताल शुरू हुई।
- हड़ताल के पहले दिन बठिंडा के सभी 53 क्लीनिक बंद रहे।
- मरीजों को इलाज और दवाओं के लिए दूसरे सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
बठिंडा। अपनी लंबित मांगों को लेकर आम आदमी क्लीनिकों में कार्यरत डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल असिस्टेंटों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। आम आदमी क्लीनिक सांझा फ्रंट पंजाब के आह्वान पर शुरू हुई इस हड़ताल का बठिंडा जिले में व्यापक असर देखने को मिला।
हड़ताल के पहले दिन जिले के सभी 53 आम आदमी क्लीनिक पूरी तरह बंद रहे। इससे हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं, मरीजों की संख्या बढ़ने से सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और उपमंडल अस्पतालों (एसडीएच) पर भी अतिरिक्त दबाव बढ़ गया।
सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
मंगलवार सुबह जिले के विभिन्न आम आदमी क्लीनिकों में तैनात कर्मचारी सिविल अस्पताल बठिंडा परिसर में एकत्र हुए और सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर रोष धरना दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।
हड़ताल के चलते आम आदमी क्लीनिकों में रोजाना इलाज और दवाएं लेने पहुंचने वाले मरीजों को परेशानी हुई। कई मरीज निर्धारित समय पर क्लीनिक पहुंचे, लेकिन केंद्र बंद मिलने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा।
सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा मरीजों का दबाव
बड़ी संख्या में मरीज दवा लेने और जांच कराने के लिए सिविल अस्पताल, सीएचसी और एसडीएच पहुंचे। इससे अस्पतालों में सामान्य दिनों के मुकाबले मरीजों की संख्या बढ़ गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अगर हड़ताल लंबे समय तक चलती है तो सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव और बढ़ सकता है।
आम आदमी क्लीनिक शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में मरीजों को घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं, मुफ्त दवाएं और जरूरी जांच की सुविधा मिलने लगी थी। इससे सिविल अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम हुआ था। अब क्लीनिक बंद होने के कारण मरीजों को दोबारा अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
सरकार के साथ कई दौर की बैठकें
धरने को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। हर बार मांगों पर सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिया गया, लेकिन अब तक किसी भी आश्वासन को लागू करने के लिए लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और इसी वजह से उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। यूनियन के अनुसार, प्रमुख मांगों में वेतन और इंसेंटिव में वार्षिक वृद्धि, कैजुअल एवं मेडिकल अवकाश, नौकरी की सुरक्षा, सेवा शर्तों में सुधार और कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करना शामिल है।
मांगों को नजरअंदाज करने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आम आदमी क्लीनिकों की सफलता में डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और क्लीनिकल असिस्टेंटों की अहम भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भी कई बार मुलाकात कर मांगें रखी गई हैं। इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
यूनियन नेताओं ने कहा कि जब तक सरकार मांगों को लेकर लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि बठिंडा के अलावा पंजाब के विभिन्न जिलों में भी सिविल सर्जन कार्यालयों के बाहर इसी तरह धरने दिए जा रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
उधर, हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़े असर को देखते हुए मरीजों और उनके परिजनों ने सरकार और कर्मचारी संगठनों से जल्द समाधान निकालने की अपील की है।
लोगों का कहना है कि आम आदमी क्लीनिक बंद रहने से सबसे अधिक परेशानी गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को हो रही है, जो रोजाना की दवाओं और प्राथमिक उपचार के लिए इन केंद्रों पर निर्भर हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.