गुजरात विधानसभा में ‘वंदे मातरम’ पर बवाल, कांग्रेस विधायक के बैठे रहने पर भाजपा ने जताई नाराजगी

HIGHLIGHTS
- मानसून सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस ने सत्याग्रह छावनी में प्रदर्शन किया।
- प्रदर्शन में किसानों के लंबित मुद्दों और महंगाई को उठाया गया।
- आप नेता सूखी और सड़ी फसलों के नमूने लेकर विधानसभा की ओर बढ़े।
अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन हंगामे और राजनीतिक गतिविधियों से भरा रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही दो प्रमुख मुद्दों को लेकर विवाद सामने आया।
एक ओर सदन के भीतर 'वंदे मातरम' के अपमान का मामला गरमाया, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने सदन के बाहर महंगाई और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
'वंदे मातरम' के दौरान बैठे रहे कांग्रेस विधायक
मानसून सत्र की शुरुआत परंपरा के मुताबिक राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गान से हुई। इसी दौरान विवाद उस समय बढ़ गया, जब कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला अपनी सीट पर खड़े होने के बजाय बैठे रहे।
सत्ता पक्ष भाजपा ने इस पर कड़ा विरोध जताया। गुजरात के मंत्री प्रवीन माली ने इसे मातृभूमि और राष्ट्रगीत का सीधा अपमान बताया। उन्होंने कहा कि विधायक को स्पष्ट करना चाहिए कि यह जानबूझकर किया गया या अनजाने में हुई गलती थी। अगर यह गलती थी तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
भाजपा ने इसे गुजरात की जनता का अपमान बताया
भाजपा विधायक महेश कसवाला ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर में ऐसा अपमान गुजरात की जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। सत्ता पक्ष के विधायक इस मामले को लेकर विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।
महंगाई और किसानों के मुद्दे पर विपक्ष का प्रदर्शन
सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने भी अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस के विधायक और कार्यकर्ता गांधीनगर स्थित सत्याग्रह छावनी पहुंचे और किसानों के लंबित मुद्दों तथा बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर लेकर उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और धरने पर बैठ गए।
वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने किसानों की स्थिति को सामने रखने के लिए अलग तरीके से विरोध किया। वे हाथों में घास के पूले और खेतों की सूखी व सड़ी हुई फसलों के नमूने लेकर विधानसभा की ओर जा रहे थे। हालांकि, भारी पुलिस बल ने उन्हें विधानसभा परिसर में प्रवेश करने से पहले ही रोक दिया।
किसानों को अब 10 घंटे बिजली देने का ऐलान
विपक्ष के प्रदर्शन और सरकार पर किए जा रहे हमलों के बीच राज्य सरकार ने किसानों के लिए एक बड़ा ऐलान किया। सरकार ने खेती के लिए मिलने वाली बिजली की आपूर्ति 8 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे करने की घोषणा की है। बुवाई के समय किए गए इस फैसले से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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