लखनऊ में दुर्गा और रामलीला पंडालों की जांच तेज, विद्युत सुरक्षा के 11 मानकों का पालन जरूरी

HIGHLIGHTS
- लखनऊ में दुर्गा और रामलीला पंडालों के निरीक्षण के लिए चार टीमें गठित की गई हैं।
- निदेशालय के अनुसार, 12 अक्टूबर तक 250 पंडालों का निरीक्षण किया गया।
- एसओपी का पालन होने के बाद ही एनओसी और बिजली कनेक्शन दिया जा रहा है।
लखनऊ। राजधानी में रामलीला और दुर्गा पंडालों में रोशनी की व्यवस्था करने से पहले आयोजकों को विद्युत सुरक्षा निदेशालय के 11 मानकों का पालन करना होगा। इसके लिए निदेशालय ने लखनऊ में चार टीमें गठित की हैं। विद्युत सुरक्षा अधिकारी से लेकर सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी पंडालों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करा रहे हैं। निदेशालय का दावा है कि 12 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा और रामलीला से जुड़े 250 पंडालों की जांच कर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन कराया गया है।
निरीक्षण के बाद पंडालों के लिए एनओसी जारी की जा रही है। वहीं, बिजली विभाग भी एसओपी का पालन होने के बाद ही बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा रहा है। विद्युत सुरक्षा निदेशालय के निदेशक गिरीश कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में गठित निदेशालय की टीमें पिछले चार दिनों से पंडालों में अभियान चलाकर सुरक्षा मानकों का पालन करा रही हैं। बड़े पंडालों के आयोजकों को आमतौर पर इन नियमों की जानकारी है। इसके बावजूद किसी तरह की कमी न रह जाए, इसलिए टीमों ने रविवार को भी जांच की।
सहायक निदेशक आलोक शुक्ला के मुताबिक, पंडालों के आसपास मौजूद बिजली लाइनों और ट्रांसफार्मरों में पाई जाने वाली खामियों को दूर करने के लिए बिजली अभियंताओं को सलाह दी गई है। ज्यादातर स्थानों पर बिजली विभाग की टीमों ने सुधार भी कर लिया है। बिजली विभाग को नौ बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
शुक्ला ने बताया कि एसओपी की जानकारी बिजली अभियंताओं को पहले से है। इसके बावजूद पंडालों वाले क्षेत्रों के संबंधित बिजली उपकेंद्रों के अभियंताओं को एसओपी भेजकर नियमों से अवगत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर की दोपहर तक निरीक्षण का काम पूरा कर लिया जाएगा।
क्या हैं विद्युत सुरक्षा के 11 मानक?
पंडालों में लगाई जाने वाली झालरें आम लोगों की पहुंच से दूर होनी चाहिए। झालरों में कटे-फटे तारों का इस्तेमाल नहीं किया जाए।
ओवरहेड बिजली लाइन के नीचे पंडाल नहीं लगाया जाए।
पंडालों में इस्तेमाल होने वाले बिजली उपकरण भारतीय मानक ब्यूरो के निर्धारित मानकों के अनुरूप होने चाहिए।
पंडाल में बिजली से संबंधित काम लाइसेंस प्राप्त विद्युत ठेकेदार से कराया जाए।
लाइट और पंखे के प्रत्येक सर्किट पर 800 वाट तथा पावर सर्किट के प्रत्येक सर्किट पर 2000 वाट से अधिक लोड नहीं होना चाहिए। लोड बैलेंसिंग भी जरूरी है।
उचित क्षमता के एमसीबी, आइसोलेटर और मेन स्विच का इस्तेमाल किया जाए। पंडाल में अधिक लोड होने पर सर्किट ब्रेकर लगाया जाए।
जनरेटर की बॉडी और न्यूट्रल को दो अलग-अलग क्षमता की अर्थिंग से जोड़ा जाए।
मेला परिसर में बिजली से चलने वाले झूलों को अर्थिंग के माध्यम से दो अलग-अलग स्थानों पर भू-संयोजित कराना अनिवार्य होगा।
पंडाल में इस्तेमाल होने वाली सर्विस केबल उचित क्षमता की होनी चाहिए।
पंडाल में जितना बिजली लोड लिया गया है, उसमें बाद में बढ़ोतरी नहीं की जाए। ऐसा करना वर्जित है।
बिजली के तारों में खुले जोड़ नहीं छोड़े जाएं। सभी जोड़ों को इन्सुलेशन टेप से सुरक्षित किया जाए।
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