ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा, अराघची बोले- 'डूम्सडे वॉर' के लिए भी तैयार

HIGHLIGHTS
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने NBC न्यूज के कार्यक्रम में बयान दिया।
- अराघची ने राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा की बात कही।
- ईरान ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों को लेकर चिंता से इनकार किया।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश किसी भी नए अमेरिकी हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने यहां तक कहा कि स्थिति ‘डूम्सडे वॉर’ यानी बेहद विनाशकारी युद्ध तक पहुंचने पर भी ईरान इसके लिए तैयार रहेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से दिए गए सात दिन के संघर्षविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
ईरान ने अपने प्रस्ताव में कुछ शर्तों के साथ होरमुज जलडमरूमध्य को खोलने और उसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करने की पेशकश की थी। इसी बीच ब्रिटेन में आरएएफ फेयरफर्ड एयरबेस के पास आतंकवादी हमले की तैयारी के संदेह में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इसके बाद अमेरिका ने ब्रिटेन में रह रहे अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है।
‘डूम्सडे वॉर’ के लिए भी तैयार है ईरान
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में कहा कि ईरान किसी भी नए अमेरिकी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए हर तरह की स्थिति का सामना करेगा।
अराघची ने कहा कि ईरान को अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों की चिंता नहीं है और उसका ध्यान अपने राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति का रास्ता बंद नहीं करना चाहता और शांति के लिए मिलने वाले किसी भी अवसर को गंवाना नहीं चाहिए।
ईरान ने रखा था 7 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव
ईरान ने अमेरिका के सामने सात दिनों की एक योजना रखी थी। इसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने के बाद सातवें दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर व्यापक वार्ता शुरू करने की पेशकश की गई थी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अब्बास अराघची ने कहा था कि यह प्रस्ताव जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अस्थायी संघर्षविराम से संबंधित समझौते के ज्ञापन यानी MoU के समान है। ईरान की ओर से यह संकेत भी दिया गया था कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले किसी समझौते पर पहुंचने की संभावना हो सकती है।
ट्रंप ने प्रस्ताव को किया खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से अस्वीकार कर दिया। ट्रंप के अनुसार, ईरान ऐसा समझौता चाहता है जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोलना शामिल है।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की मांगों पर कई आपत्तियां जताई हैं। अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान के प्रस्ताव में जमी हुई संपत्तियों तक अरबों डॉलर की पहुंच और प्रतिबंधों में राहत जैसी मांगें भी शामिल थीं।
ईरान की क्या मांग है?
अब्बास अराघची के अनुसार, ईरान चाहता है कि उसकी जमी हुई संपत्तियां और धन उसे वापस मिले। इसके अलावा तेहरान की इच्छा है कि वह अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके।
अराघची ने कहा कि इन शर्तों पर बातचीत होने की स्थिति में ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, ये मांगें जून में तैयार किए गए अस्थायी संघर्षविराम से जुड़े MoU में शामिल शर्तों के अनुरूप हैं।
अमेरिका को ईरान पर क्यों है अविश्वास?
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने ईरान के पिछले कदमों का हवाला देते हुए कहा कि पहले हुई समझ के बावजूद ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले किए।
वॉल्ट्ज ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन का मुख्य ध्यान लंबे समय के लिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े प्रसार के खतरे को रोकने पर है। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सभी विकल्प खुले रखेंगे।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर क्यों टिकी है नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इस समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी तरह का टकराव वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन सकता है।
ईरान ने बातचीत के हिस्से के तौर पर इस समुद्री मार्ग को खोलने की पेशकश की है, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने ईरान की शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य तनाव बना हुआ है।
ब्रिटेन में आरएएफ फेयरफर्ड के पास पांच गिरफ्तार
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच ब्रिटेन में सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आरएएफ फेयरफर्ड एयरबेस के पास आतंकवादी हमले की तैयारी के संदेह में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अमेरिकी दूतावास ने ब्रिटेन में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी करते हुए उन्हें सतर्क रहने की सलाह दी है। दूतावास के अनुसार, ब्रिटिश अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर कुछ स्थानीय निवासियों को इलाके से बाहर निकाला है।
ब्रिटेन में आतंकवाद का खतरा ‘गंभीर’
अमेरिकी दूतावास ने बताया कि ब्रिटेन में अधिकारियों ने आतंकवाद के खतरे का स्तर ‘गंभीर’ रखा हुआ है। अमेरिकी नागरिकों से आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
नागरिकों को अपनी निजी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने, परिवार और दोस्तों को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देने तथा स्थानीय मीडिया से अपडेट लेते रहने की सलाह दी गई है। अमेरिका ने नागरिकों को स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम यानी STEP में पंजीकरण कराने की भी सलाह दी है।
ट्रंप ने ब्रिटेन-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई की तारीफ की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आरएएफ फेयरफर्ड के पास हुई गिरफ्तारियों को लेकर ब्रिटेन और अमेरिका की संयुक्त सुरक्षा कार्रवाई की सराहना की। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि संदिग्धों पर काफी समय से नजर रखी जा रही थी और वे बंदरगाहों को बड़ा नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे थे।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी के बाद कार्रवाई करते हुए संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया।
आरएएफ फेयरफर्ड क्यों है रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण?
आरएएफ फेयरफर्ड ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है और अमेरिकी सैन्य अभियानों में भी इसकी अहम भूमिका रही है। यह यूएस ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के लिए एक महत्वपूर्ण फॉरवर्ड ऑपरेटिंग साइट के रूप में काम करता है और यहां 501st कॉम्बैट सपोर्ट विंग मौजूद है।
यह बेस पहले अमेरिकी B-1 बमवर्षकों जैसे भारी सैन्य विमानों की तैनाती के केंद्र के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। इन विमानों का उपयोग मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के दौरान भी किया गया है।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता
फिलहाल ईरान की ओर से अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखने की बात कही जा रही है, लेकिन युद्ध और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की पेशकश और ट्रंप प्रशासन की असहमति के बीच कूटनीतिक स्थिति पर दुनिया की नजर बनी हुई है। इसी दौरान ब्रिटेन में आरएएफ फेयरफर्ड के पास हुई गिरफ्तारियों से सुरक्षा संबंधी चिंता भी बढ़ी है। ब्रिटिश अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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