पेपर लीक मुद्दे पर खरगे का सरकार पर हमला, बोले- चर्चा चाहते तो पहले ही अनुमति देते

HIGHLIGHTS
- मल्लिकार्जुन खरगे ने किरेन रिजिजू के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया।
- खरगे ने पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
- प्रियांक खरगे ने भी केंद्र सरकार से छात्रों के मुद्दों को लेकर कई सवाल पूछे।
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के उस आरोप को खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले पर चर्चा से बच रहा है। खरगे ने कहा कि अगर सरकार वास्तव में बहस चाहती थी तो विपक्ष की पहली मांग पर ही चर्चा की अनुमति दे दी जाती।
खरगे ने सरकार पर साधा निशाना
पत्रकारों से बातचीत के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
खरगे ने कहा कि अगर सरकार चर्चा के लिए तैयार होती तो जिस दिन विपक्ष ने इसकी मांग की थी, उसी दिन चर्चा शुरू हो जाती। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार पहले इसके लिए तैयार क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि बाद में छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। खरगे ने आरोप लगाया कि सांसद होने के बावजूद सत्ताधारी दल के लोगों ने खुद दरवाजा बंद कर दिया।
पीएम मोदी पर भी उठाए सवाल
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस मामले पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह स्वीकार्य नहीं होगा।
उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री अब तक चुप क्यों रहे। खरगे ने कहा कि अगर इस स्थिति के लिए कोई जिम्मेदार है तो वह प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपने सांसदों से छात्रों के आंदोलन का विरोध करने को कहा है।
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री की मंशा सही नहीं है और उन्होंने कभी भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं की।
उन्होंने कहा कि विपक्ष नियम 267 के तहत चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं का अपमान किया गया। खरगे ने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद ही किसी भी चर्चा के लिए तैयार होंगे।
प्रियांक खरगे ने केंद्र से पूछा सवाल
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने भी शिक्षा मंत्री को हटाने से इनकार करने के केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार लाखों छात्रों के भविष्य की जगह एक मंत्री को प्राथमिकता क्यों दे रही है।
उन्होंने सवाल किया, "धर्मेंद्र प्रधान भारत सरकार के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?"
प्रियांक खरगे ने कहा कि अगर सरकार अभी भी छात्रों की भावनाओं को नहीं समझती है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने पूछा कि क्या धर्मेंद्र प्रधान इतने जरूरी हैं कि करोड़ों छात्रों की परेशानी के बावजूद सरकार एक जिम्मेदार मंत्री को नहीं हटा सकती।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों को लेकर भी निशाना
प्रियांक खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मन की बात और परीक्षा पे चर्चा जैसे कार्यक्रम करते हैं, लेकिन छात्रों से बातचीत के लिए समय नहीं निकालते।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री छात्रों के बिना ही अमृतकाल और विकसित भारत का निर्माण करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जो स्थिति बनी हुई है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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