पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद पर विराम, राजा वड़िंग ही बने रहेंगे प्रदेश अध्यक्ष

HIGHLIGHTS
- पंजाब कांग्रेस में चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल खत्म होता नजर आ रहा है। हाईकमान ने साफ कर दिया है कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहेंगे।
- पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करते हुए कहा कि संगठन उनके लिए सबसे ऊपर है और हाईकमान का निर्णय अंतिम होगा।
- कांग्रेस अब आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों और संगठन को मजबूत करने पर फोकस करेगी।
चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ दिनों से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खत्म होती दिखाई दे रही है। नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ हुई बैठक के बाद पार्टी हाईकमान ने साफ कर दिया है कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग अपने पद पर बने रहेंगे।
बैठक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि उनके लिए संगठन सबसे ऊपर है और हाईकमान का निर्णय अंतिम होगा। चन्नी ने राहुल गांधी को अपना नेता बताते हुए पार्टी के हर फैसले का सम्मान करने की बात कही।
चन्नी समर्थक कर रहे थे बदलाव की मांग
दरअसल, पिछले करीब 15 दिनों से चन्नी और उनके समर्थक राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग उठा रहे थे। पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने भी अपने चंडीगढ़ दौरे के दौरान स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष बदलने की कोई योजना नहीं है।
बघेल के दौरे के अंतिम दिन चन्नी गुट के नेताओं ने राणा गुरजीत सिंह के आवास पर बैठक कर अपनी मांग दोहराई थी। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता शामिल हुए थे। हालांकि, अब हाईकमान के रुख के बाद विरोधी गुट की आगे की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।
चुनावी तैयारियों पर रहेगा कांग्रेस का फोकस
सूत्रों के मुताबिक, पूरे विवाद के दौरान राहुल गांधी ने चन्नी गुट के नेताओं से अलग कोई बैठक नहीं की। हालांकि संसद सत्र के दौरान चन्नी और राहुल गांधी की मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राहुल गांधी के जल्द पंजाब दौरे की भी चर्चा है।
कांग्रेस नेतृत्व अब संगठन में एकजुटता लाने और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। हाईकमान का संदेश साफ है कि आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर पार्टी संगठन को मजबूत करना सभी नेताओं की प्राथमिकता होनी चाहिए।
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