महाराष्ट्र आरक्षण विवाद: जरांगे के अनशन के बीच OBC कार्यकर्ताओं ने भी शुरू की भूख हड़ताल

HIGHLIGHTS
- आंदोलन अंतरवाली सराटी गांव के सोनिया नगर में शुरू किया गया।
- भूख हड़ताल में मंगेश ससाणे, विठ्ठल तालेकर, सतीश कुलाल और बाबासाहेब बाटुले शामिल हैं।
- प्रदर्शनकारियों ने ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।
महाराष्ट्र के जालना में मराठा आरक्षण आंदोलन के बीच अब ओबीसी समुदाय ने भी विरोध शुरू कर दिया है। रविवार को ओबीसी कार्यकर्ताओं ने मनोज जरांगे के प्रदर्शन स्थल से कुछ ही मीटर की दूरी पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। यह आंदोलन अंतरवाली सराटी गांव के सोनिया नगर में शुरू किया गया है। इसमें मंगेश ससाणे, विठ्ठल तालेकर, सतीश कुलाल और बाबासाहेब बाटुले शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण में हिस्सेदारी की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं।
क्या है मनोज जरांगे की मांग?
मनोज जरांगे का अनिश्चितकालीन अनशन रविवार को नौवें दिन भी जारी रहा। उनके साथियों का दावा है कि उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई है। बताया गया है कि जरांगे पिछले दो दिनों से पानी, इलाज और नस के जरिए दिए जाने वाले फ्लूड्स लेने से भी इनकार कर रहे हैं।
जरांगे की प्रमुख मांग मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में आरक्षण देने की है। इसके लिए वह हैदराबाद गजट और सातारा गजट के रिकॉर्ड लागू करने के साथ पात्र मराठा लोगों को कुनबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
क्या है कुनबी का मुद्दा?
- कुनबी पारंपरिक रूप से खेती-किसानी से जुड़ा समुदाय है, जो आधिकारिक तौर पर ओबीसी श्रेणी में आता है।
- कुनबी प्रमाणपत्र मिलने के बाद पात्र लोगों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकता है।
ओबीसी कार्यकर्ताओं को किस बात की आशंका?
ओबीसी कार्यकर्ता मंगेश ससाणे का आरोप है कि जरांगे के आंदोलन के जरिए राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्हें आशंका है कि मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करने से ओबीसी समुदाय के मौजूदा आरक्षण हिस्से पर असर पड़ सकता है।
ससाणे ने दावा किया कि अभी तक मराठा समुदाय के करीब 22 लाख जाति प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और एमएलसी प्रसाद लाड उन्हें हर संभव समर्थन दे रहे हैं।
सरकार के फैसले पर सवाल क्यों?
ससाणे ने मराठों को कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति को ‘अवैध’ बताया। उनका कहना है कि जांच के दौरान पहले जारी किए गए कई मराठा जाति प्रमाणपत्रों को सत्यापन समितियों ने खारिज किया है।
ससाणे ने सवाल उठाया कि जब जाति सत्यापन समितियों ने कुछ प्रमाणपत्रों को खारिज किया है, तो जरांगे इस फैसले पर सवाल क्यों उठा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मंत्री मराठों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कराने की साजिश कर रहे हैं। ससाणे ने सरकार पर एक समुदाय को ‘विशेष व्यवहार’ देने का आरोप भी लगाया।
हालांकि, ये सभी आरोप ओबीसी कार्यकर्ताओं की ओर से लगाए गए हैं। ओबीसी प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के मुद्दे पर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले युवाओं के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने ऐसे परिवारों के पात्र सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी है।
दोनों आंदोलनों के आमने-सामने होने से क्या स्थिति?
ओबीसी कार्यकर्ताओं ने आंदोलन के बीच वहां आने वाले मंत्रियों को भी चेतावनी दी है। ससाणे ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर मंत्रियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी।
वहीं, मनोज जरांगे पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह आंदोलन तेज करने के लिए मुंबई तक मार्च करेंगे। जरांगे के साथियों के मुताबिक, सरकार की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों को लागू करने में हो रही देरी के विरोध में उनका अनशन जारी है।
दोनों प्रदर्शन स्थल एक-दूसरे के बेहद करीब हैं। ऐसे में किसी भी टकराव को रोकने के लिए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
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