धामी कैबिनेट के बड़े फैसले, 1.19 लाख छात्रों के कौशल विकास योजना को मंजूरी

HIGHLIGHTS
- योजना पर पांच साल में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे
- डिजिटल साक्षरता और तकनीकी कौशल को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा
- कर्मचारियों के लिए संपत्ति की जानकारी देना अनिवार्य
चंपावत। सुदूरवर्ती इलाकों तक शासन की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई पहल की है। इसी क्रम में रविवार को नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में धामी कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में युवाओं के कौशल विकास पर फोकस करने के साथ कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
बैठक में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों की रोजगार क्षमता और उद्यमिता को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 संचालित करने का निर्णय लिया गया।
इस योजना के तहत सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 1.19 लाख छात्रों को कौशल संवर्द्धन के माध्यम से रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
कैबिनेट ने राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली को भी मंजूरी दी। इसके तहत समूह क, ख, ग और घ के कर्मचारियों के लिए आयकर विवरणी दाखिल करते समय संपत्ति का ब्योरा देना अनिवार्य किया गया है।
कर्मचारियों को यह राहत भी दी गई है कि खरीद की सीमा केंद्र के समान दो माह के वेतन के बराबर कर दी गई है। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र चंपावत में पहली बार आयोजित कैबिनेट बैठक में 24 विषय रखे गए थे। इन पर चर्चा के बाद निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्द्धन योजना लागू करने के फैसले के जरिए सरकार ने युवाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की अवधारणा पर आधारित इस योजना में डिजिटल साक्षरता और तकनीकी कौशल को पाठ्यक्रम की क्रेडिट संरचना में शामिल किया जाएगा। योजना के तहत पांच साल में 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
दो माह के वेतन से अधिक खरीद के लिए लेनी होगी अनुमति
संशोधित आचरण नियमावली में प्रावधान किया गया है कि समूह क, ख, ग और घ के कर्मचारी यदि सरकार से लेनदेन करने वाली किसी संस्था से संपत्ति खरीदते हैं तो उन्हें इसकी जानकारी शासन को देनी होगी।
दो माह के वेतन से अधिक की खरीद के लिए कर्मचारियों को शासन से अनुमति लेनी होगी। समूह क, ख और ग के कर्मचारी हर साल आयकर विवरणी में अपनी संपत्ति का ब्योरा देंगे, जबकि समूह घ के कर्मचारियों को पांच साल में एक बार यह जानकारी देनी होगी।
गलत पैन पर नहीं होगी रजिस्ट्री
संपत्ति की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने और आयकर चोरी पर रोक लगाने के लिए मंत्रिमंडल ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की संपत्ति की रजिस्ट्री में खरीदार और विक्रेता, दोनों के पैन नंबर का सत्यापन अनिवार्य होगा।
रजिस्ट्री के दौरान पैन नंबर दर्ज करते ही सॉफ्टवेयर उसका स्वत: सत्यापन करेगा। पैन नंबर गलत या अमान्य पाए जाने पर रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी।
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