मार्को रूबियो मुंबई से जामनगर रवाना, भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कही बड़ी बात

HIGHLIGHTS
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बुधवार को मुंबई से गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए।
- जामनगर में रिलायंस दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक का संचालन करती है।
- रूबियो के दौरे में भारत-अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की संभावना है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बुधवार को अपनी भारत यात्रा के दूसरे चरण में मुंबई से गुजरात के जामनगर के लिए रवाना हुए। जामनगर दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक का केंद्र है, जिसका संचालन रिलायंस करती है। रूबियो के इस दौरे के दौरान भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने रूबियो की यात्रा से पहले कहा था कि इस साल उनकी दूसरी भारत यात्रा मुंबई और जामनगर जैसे प्रमुख वित्तीय, ऊर्जा और सांस्कृतिक केंद्रों पर केंद्रित है। विभाग के अनुसार, भारत-अमेरिका संबंध अमेरिका की सुरक्षा और समृद्धि के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। यह दौरा दोनों देशों के बीच वाणिज्यिक निवेश, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
व्यापार, रक्षा और तकनीक पर भी हुई चर्चा
मार्को रूबियो ने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक बातचीत की थी। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और इसे जल्द अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
मंत्रालय ने कहा कि रूबियो का दौरा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में बनी निरंतर गति को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह 21वीं सदी के लिए भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट को आगे बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।
ट्रेड डील पर बोले रूबियो- समझौता अंतिम चरण के करीब
मार्को रूबियो ने मंगलवार रात एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण के करीब पहुंच गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसे महीनों के बजाय कुछ ही हफ्तों में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यापार प्रतिनिधि इस समझौते पर बातचीत कर रहे हैं और वह सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि वह वार्ता में हो रही प्रगति पर करीबी नजर रख रहे हैं।
रूबियो ने कहा कि उन्होंने पहले भी समझौते को लेकर ऐसी उम्मीद जताई थी। उनके मुताबिक, इस तरह के समझौतों में सार्वजनिक घोषणा से पहले सभी बिंदुओं पर पूरी सहमति होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण संबंधों को जल्दबाजी में घोषणा करके जोखिम में नहीं डाला जा सकता, क्योंकि बाद में समझौते को अंतिम रूप देने में परेशानी हो सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि समझौता अब काफी करीब है और कुछ तकनीकी मुद्दों पर काम होना बाकी है। रूबियो के अनुसार, ये तकनीकी बिंदु भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि दोनों पक्षों के लिए समझौते की भाषा और उसके अर्थ पर एकमत होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बातचीत अब इसी स्तर पर पहुंच चुकी है।
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