मुजफ्फरनगर में भाकियू का धरना प्रदर्शन खत्म, प्रशासन से वार्ता के बाद बनी सहमति

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर सदर तहसील में भारतीय किसान यूनियन का धरना प्रशासन से वार्ता और मांगों पर आश्वासन मिलने के बाद समाप्त हो गया।
- किसानों ने भ्रष्टाचार, दाखिल-खारिज, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, अवैध कब्जे और जलभराव समेत 11 मुद्दों को लेकर मांगपत्र सौंपा था।
- भाकियू ने चेतावनी दी है कि तय समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर सदर तहसील परिसर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का चल रहा धरना-प्रदर्शन बुधवार देर शाम प्रशासन के साथ हुई वार्ता के बाद समाप्त हो गया। तेज बारिश के बीच दिनभर चले आंदोलन के बाद किसान नेताओं और अधिकारियों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी।
भाकियू कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के नाम 11 सूत्रीय मांगपत्र नगर मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौड़ को सौंपा था। शाम को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई और समाधान का भरोसा दिया गया। इसके बाद संगठन ने धरना समाप्त करने का ऐलान किया।
भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर उठाई आवाज
भाकियू जिलाध्यक्ष नवीन राठी के नेतृत्व में किसानों ने तहसील परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान तहसील और राजस्व विभाग में कथित भ्रष्टाचार, दाखिल-खारिज और आय प्रमाण पत्र बनवाने में अवैध वसूली, राशन कार्ड से जुड़ी समस्याएं, अवैध कब्जे, स्मार्ट मीटर और जलभराव जैसे मुद्दे उठाए गए।
किसान नेताओं का आरोप था कि सरकारी कार्यालयों में आम लोगों और किसानों को अपने काम कराने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन में किया गया विस्तार
प्रदर्शन के दौरान भाकियू ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाते हुए मोनू बालियान बरवाला को जिला महासचिव नियुक्त किया। उनके मनोनयन पर कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया और संगठन की गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
वहीं, पुरकाजी ब्लॉक अध्यक्ष मोनू चौधरी ने सदर तहसील में दाखिल-खारिज और फर्द में नाम दर्ज कराने के नाम पर कथित वसूली का मुद्दा उठाया। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी कुछ आरोप लगाए।


मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर आंदोलन की चेतावनी
प्रशासन और किसान नेताओं के बीच हुई बैठक में अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। वार्ता के बाद भाकियू ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया।
संगठन ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया गया है। यदि तय समय में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान दोबारा आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
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