दिल्ली से गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन का रास्ता साफ, चिकन नेक में खर्च होंगे दो से तीन गुना ज्यादा पैसे

HIGHLIGHTS
- दिल्ली से गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन चलाने के लिए उत्तर कॉरिडोर को मंजूरी मिली है।
- प्रस्तावित रूट में आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी शामिल हैं।
- चिकन नेक गलियारे में भूमिगत सुरंग या एलिवेटेड ट्रैक बनाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन चलाने की योजना को मंजूरी मिलने के बाद अब इसके रूट और निर्माण तकनीक को लेकर मंथन शुरू हो गया है। प्रस्तावित ट्रेन पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले संवेदनशील चिकन नेक गलियारे से होकर गुजरेगी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को बताया कि इस संकरे क्षेत्र में बुलेट ट्रेन के संचालन के लिए भूमिगत सुरंग या जमीन से ऊपर एलिवेटेड ट्रैक बनाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। हालांकि, अभी इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। सर्वे और तकनीकी अध्ययन के बाद ही रास्ता तय होगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस हिस्से में सामान्य रेलवे परियोजना के मुकाबले दो से तीन गुना अधिक खर्च आने की संभावना है।
बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ी प्रमुख बातें
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन दिल्ली से गुवाहाटी के बीच संचालित करने की योजना है। इसके लिए उत्तर कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। इस रूट में दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी जैसे शहर शामिल होंगे।
इस परियोजना के तहत चिकन नेक गलियारे को पार करने के लिए भूमिगत सुरंग या एलिवेटेड ट्रैक का विकल्प चुना जा सकता है। इस क्षेत्र में ट्रेन के संचालन के लिए अलग तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग की आवश्यकता होगी।
बुलेट ट्रेन को मौजूदा रेलवे ट्रैक पर नहीं चलाया जा सकेगा। इसके लिए पूरी तरह अलग रेल लाइन का निर्माण करना होगा। इस वजह से परियोजना पर सामान्य परिस्थितियों की तुलना में दो से तीन गुना तक ज्यादा लागत आने का अनुमान है।
चिकन नेक से बुलेट ट्रेन का रास्ता तैयार करना क्यों मुश्किल?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के अनुसार, चिकन नेक गलियारे की चौड़ाई करीब 22 किलोमीटर है, जबकि कुछ स्थानों पर यह घटकर केवल 16 किलोमीटर रह जाती है। यही संकरा इलाका पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने का काम करता है।
इस क्षेत्र में पहले से ही राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे लाइन मौजूद हैं। ऐसे में बुलेट ट्रेन के लिए अलग ट्रैक तैयार करना एक बड़ी चुनौती होगी। मौजूदा रेलवे लाइन पर बुलेट ट्रेन नहीं चलाई जा सकती, इसलिए इसके लिए नया और स्वतंत्र रेल मार्ग बनाना जरूरी है।
सीमित जमीन और इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए निर्माण के दौरान विशेष इंजीनियरिंग तकनीक अपनानी होगी। इसी कारण सरकार के पास दो विकल्प हैं। पहला, जमीन के नीचे सुरंग बनाकर ट्रेन का संचालन करना और दूसरा, जमीन से ऊपर खंभों पर एलिवेटेड ट्रैक तैयार करना।
इन दोनों विकल्पों में से किसे चुना जाएगा, इसका फैसला सर्वे और तकनीकी अध्ययन पूरा होने के बाद किया जाएगा।
क्या पहले गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाना मुश्किल माना जा रहा था?
हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि शुरुआती दौर में केंद्र सरकार की ओर से संकेत मिले थे कि गुवाहाटी तक बुलेट ट्रेन पहुंचाना संभव नहीं हो सकता। इसके बाद उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इन बैठकों के बाद गुवाहाटी को प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क में शामिल करने पर सहमति बनी।
मुख्यमंत्री ने इसे एक बड़ा, उल्लेखनीय और साहसिक फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि परियोजना के रूट और तकनीक से जुड़ी कई जानकारियां अभी सामने आनी बाकी हैं।
सरमा ने कहा कि अगली बार दिल्ली दौरे के दौरान वह रेल मंत्री से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में चिकन नेक क्षेत्र से बुलेट ट्रेन को निकालने की तकनीक और परियोजना से जुड़े अन्य पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को मंजूरी मिलना केवल शुरुआती कदम है। इसके बाद सर्वे, तकनीकी योजना और अलग रेलवे लाइन के निर्माण सहित कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
बुलेट ट्रेन परियोजना पर कितना खर्च आने का अनुमान?
मुख्यमंत्री के मुताबिक, चिकन नेक जैसे संकरे और संवेदनशील क्षेत्र से बुलेट ट्रेन का रास्ता तैयार करने में काफी निवेश करना पड़ेगा। इस हिस्से में सामान्य रेल परियोजना की तुलना में दो से तीन गुना तक अधिक खर्च आने की संभावना है।
इसकी प्रमुख वजह अलग निर्माण तकनीक, भूमिगत सुरंग या एलिवेटेड ट्रैक तैयार करने की जरूरत और विशेष इंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियां हैं।
हालांकि, अभी परियोजना की कुल लागत का विस्तृत अनुमान तय नहीं हुआ है। सबसे पहले प्रस्तावित मार्ग का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद यह निर्धारित होगा कि किस हिस्से में किस तरह का ट्रैक बनाया जाना उचित रहेगा।
गौरतलब है कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को जानकारी दी थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन परियोजना के उत्तर कॉरिडोर को मंजूरी दी है। यह कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और सिलीगुड़ी से होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा। इस योजना के जरिए गुवाहाटी को देश के प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।
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