जेएनयू विवाद: कांग्रेस सांसद आंगोमचा बिमोल अकोइजाम को हाई कोर्ट से राहत, बर्खास्तगी पर रोक

HIGHLIGHTS
- आंगोमचा बिमोल अकोइजाम इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं।
- वह जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर थे।
- मई में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं।
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद आंगोमचा बिमोल अकोइजाम को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से उन्हें सेवा से बर्खास्त करने के फैसले पर सोमवार को रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने अकोइजाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए जेएनयू को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा। इस मामले में अगली सुनवाई जनवरी में होगी।
बर्खास्तगी के फैसले पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक
आंगोमचा बिमोल अकोइजाम इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। वह जेएनयू के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। मई में उनके खिलाफ कम से कम 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं।
शिकायत करने वाली छात्राओं का आरोप था कि प्रोफेसर बैठकों और दूसरे कार्यक्रमों के बहाने उन्हें कैंपस स्थित अपने आवास पर बुलाते थे और उनके साथ यौन दुर्व्यवहार करने की कोशिश करते थे। कुछ छात्राओं ने कक्षा के दौरान अश्लील और अनुचित टिप्पणियां किए जाने की शिकायत भी की थी।
11 छात्राओं ने की थी शिकायत
छात्राओं की शिकायतों के बाद जेएनयू प्रशासन ने 9 अक्टूबर को अकोइजाम की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। कुलपति शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर से जारी आदेश में बताया गया था कि विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने जांच पूरी करने के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी।
समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें बर्खास्त करने का फैसला लिया था। हालांकि, अकोइजाम ने अपने खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के बर्खास्तगी आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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