सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण पर इकरा हसन का हमला, बोलीं- जल्दबाजी में की गई कार्रवाई

HIGHLIGHTS
- इकरा हसन अपने भाई नाहिद हसन के साथ सर्किट हाउस पहुंचीं।
- सांसद ने मस्जिद गिराए जाने से जुड़े आदेश की जानकारी मांगी।
- उन्होंने राज्यपाल और प्रधानमंत्री से मिलने का प्रयास करने की बात कही।
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले को लेकर कैराना सांसद इकरा हसन ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार को सहारनपुर पहुंचीं इकरा हसन ने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर प्रशासन ने जल्दबाजी करते हुए मस्जिद को ध्वस्त किया, जो गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह उच्च न्यायालय का रुख करेंगी।
सहारनपुर मस्जिद प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी के 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में कैराना सांसद इकरा हसन भी शामिल रहीं। वह अपने भाई और कैराना विधायक नाहिद हसन के साथ सहारनपुर के सर्किट हाउस पहुंचीं। इससे एक दिन पहले पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने की आशंका के चलते सांसद इकरा हसन अज्ञात स्थान पर चली गई थीं।
सर्किट हाउस में इकरा हसन ने कहा कि वह जानना चाहती हैं कि आखिर किस आदेश के आधार पर मस्जिद को तोड़ा गया। उन्होंने बताया कि वह राज्यपाल और प्रधानमंत्री से भी मिलने का प्रयास करेंगी। सांसद के मुताबिक, मस्जिद को ध्वस्त करने के संबंध में न्यायालय का कोई आदेश नहीं था।
इकरा हसन ने कहा कि मस्जिद को इस तरह ध्वस्त किया जाना बेहद दर्दनाक है। उनके अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश में 22 दिन का समय दिया गया था और उसके तहत मस्जिद को सिर्फ सील किया जाना था। मस्जिद को सील भी किया गया था, लेकिन इसके बाद पर्याप्त समय दिए बिना उसे ध्वस्त कर दिया गया। सांसद ने कहा कि वह मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले में उच्च न्यायालय जाएंगी और पूरे प्रकरण से जुड़े आदेशों की जानकारी सामने लाने का प्रयास करेंगी।
इकरा हसन के समर्थन में निषाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने दिया इस्तीफा
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष माठ खास शोकेंद्राचार्य ने पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद के साथ-साथ प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कैराना सांसद इकरा हसन के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणियों को दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया।
शोकेंद्राचार्य ने कहा कि काफी विचार-विमर्श और आत्ममंथन के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पद से ज्यादा महत्वपूर्ण विचार, सिद्धांत और जनता के प्रति जवाबदेही होती है। लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी जनप्रतिनिधि, महिला या सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्ति के लिए अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि वह इकरा हसन के सम्मान और समर्थन में मजबूती से खड़े हैं।
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