जंतर-मंतर मारपीट केस: दिल्ली कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

HIGHLIGHTS
- अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने आदेश सुनाया।
- शुक्रवार को पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था।
- मामला 23 जून को हुए प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर कथित हमले से जुड़ा है।
जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन के दौरान छात्रा कार्यकर्ता के पिता पर कथित हमले के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने यह आदेश दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किए जाने के कुछ घंटे बाद शुक्रवार को पुलिस ने भारद्वाज को बुलंदशहर से हिरासत में लिया था।
इंटरव्यू में 'सिर फोड़ने' का किया था दावा
मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक वीडियो सामने आया। वायरल इंटरव्यू में वह 23 जून को हुए प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता के पिता संजय कुमार पर हमले को लेकर कथित तौर पर दावा करता नजर आया था कि उसने उनकी खोपड़ी फोड़ दी और उन्हें 60 टांके लगे।
हालांकि, बाद में एक पॉडकास्ट में उसने दावा किया कि उसने यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की थी। शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने भी चोटों को साधारण बताते हुए कहा था कि ये स्टील के ब्रेसलेट से लगी थीं।
कई गंभीर धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल और नगीना से सांसद व आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर सख्त कार्रवाई की मांग के बाद पुलिस ने मामले में कई गंभीर धाराएं जोड़ी हैं। एफआईआर में आपराधिक धमकी और एससी/एसटी अधिनियम के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
पॉक्सो और आईटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गईं
नाबालिग छात्रा की ओर से ऑनलाइन धमकी, दुष्कर्म की धमकी, गाली-गलौज और तस्वीरों से छेड़छाड़ की शिकायत के बाद शुक्रवार को एक नई एफआईआर दर्ज की गई। इसमें यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(3), 78 (पीछा करना) और 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के साथ आईटी एक्ट की धारा 67 भी लगाई गई है।
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