'SC के बुलडोजर आदेश के बारे में आम इंसान को भी पता है', NMC अधिकारियों के दावे पर HC हैरान

HIGHLIGHTS
- याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में सुनवाई हुई
- अदालत ने NMC कमिश्नर के आईएएस अधिकारी होने का भी जिक्र किया
- NMC से पिछले 10 वर्षों की तोड़फोड़ कार्रवाई का रिकॉर्ड मांगा गया था
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने नागपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (NMC) के अधिकारियों के उस दावे पर हैरानी जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले की जानकारी नहीं थी।
अदालत ने कहा कि इस फैसले के बारे में आम आदमी तक को जानकारी है, लेकिन एनएमसी के अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है। इनमें एनएमसी कमिश्नर जैसे आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
कोर्ट ने अधिकारियों को दिया निर्देश
जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस रजनीश व्यास की बेंच ने शुक्रवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 4 सितंबर से पहले अलग-अलग हलफनामे दाखिल करें। अधिकारियों को बताना होगा कि वे अपनी पिछली सफाई पर कायम हैं या इस मामले में कोई स्पष्टीकरण देना चाहते हैं।
क्या है मामला?
अदालत महल दंगा मामले के मुख्य आरोपी फहीम खान की 69 वर्षीय मां मेहरुन्निसा शमीम खान और 96 वर्षीय अब्दुल हफीज की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अब्दुल हफीज की संपत्ति के कुछ हिस्से को इसलिए गिराया गया था, क्योंकि उनका एक रिश्तेदार महल दंगे का आरोपी था।
बेंच के सामने मुख्य सवाल यह था कि नगर निकाय ने नोटिस जारी करने के बाद किस तरह और कितनी तेजी से तोड़फोड़ की कार्रवाई की। 10 जुलाई को अदालत ने एनएमसी को रिकॉर्ड पर यह जानकारी देने को कहा था कि पिछले 10 वर्षों में कितनी बार उसने इसी तरह तेजी से कार्रवाई की और नोटिस की अवधि समाप्त होते ही अनधिकृत या अवैध निर्माणों को गिराया।
नगर निकाय ने माना कि उसके आधिकारिक आंकड़ों में पिछले 10 वर्षों के दौरान ऐसा कोई मामला नहीं मिला, जिसमें नोटिस की अवधि खत्म होते ही इस तरह की कार्रवाई की गई हो। जजों ने अन्य मामलों में अदालत के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दशक से अधिक समय से निर्देश दिए जाने के बावजूद एनएमसी ने उन पर कोई कदम नहीं उठाया।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
अदालत ने सिविक बॉडी से 13 नवंबर 2024 को आए सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर फैसले में दिए गए निर्देशों के पालन को लेकर सवाल किया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि किसी भी ढांचे को गिराने से पहले अधिकारियों को 15 दिन का नोटिस देना होगा। यह नियम उस स्थिति में भी लागू होगा, जब किसी कानून के तहत कम अवधि का नोटिस, जैसे 24 घंटे का नोटिस, देने की अनुमति हो।
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