सीएम शुभेंदु की चेतावनी के बाद JU ने कैंपस से हटाई विवादित पेंटिंग और ग्रैफिटी

HIGHLIGHTS
- जनरल मेंटेनेंस विभाग ने करीब छह घंटे तक सफाई की
- कैंपस की कई दीवारों से विवादित संदेश हटाए गए
- चार्ली चैपलिन के म्यूरल पर लिखे संदेश को भी मिटाया गया
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ‘या तो वे या हम’ वाली चेतावनी के एक दिन बाद शनिवार को जादवपुर यूनिवर्सिटी (जेयू) प्रशासन ने कैंपस में लिखे गए आपत्तिजनक स्लोगन और ग्रैफिटी पर सफेदी करा दी।
यूनिवर्सिटी के जनरल मेंटेनेंस विभाग ने कैंपस से ग्रैफिटी हटाने में करीब छह घंटे लगाए। इनमें चार्ली चैपलिन का एक म्यूरल भी शामिल था, जिस पर लिखा था, “फासीवाद पर बहस नहीं की जाती। इसे कुचल दिया जाता है।” इसके अलावा नाजी सैल्यूट वाली ग्रैफिटी भी मिटाई गईं, जिन पर “लाल रंग से फासीवाद को खत्म करो” और “कॉमरेड किशनजी जिंदाबाद” लिखा था।
सफाई अभियान में सब साफ
ओपन-एयर थिएटर की दीवारों पर लिखे संदेशों को भी मिटा दिया गया। इनमें लिखा था, “फासीवादी लोकतंत्र के लायक नहीं हैं। वे सिर में गोली खाने के लायक हैं।” इसके अलावा शरजील इमाम की तस्वीर के साथ “चक्का जाम समाधान है, देशद्रोह नहीं” और पैगंबर मोहम्मद का एक कोट भी लिखा था। फलस्तीन की आजादी की मांग से जुड़ी ग्रैफिटी को भी सफाई अभियान के दौरान हटा दिया गया।
यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “जनरल मेंटेनेंस सेक्शन को ग्रैफिटी हटाने का काम सौंपा गया था क्योंकि हम और विवाद से बचना चाहते थे। सफाई का काम एक कॉन्ट्रैक्टर को दिया गया था।”
'रेड सैल्यूट किशनजी लिखने की हिम्मत कैसे हुई?'
शुक्रवार को जेयू के गेट नंबर 2 से करीब 200 मीटर दूर एक सभा को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कैंपस में ‘कश्मीर मांगे आजादी’ और ‘रेड सैल्यूट किशनजी’ जैसे नारे लिखे जाने को लेकर जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों की कड़ी आलोचना की।
‘रेड सैल्यूट किशनजी’ लिखने की हिम्मत कैसे हुई, यह सवाल उठाते हुए अधिकारी ने कहा, “क्या आप इतने बेताब हैं? किशनजी कौन है? वही, जिसने भारत के संविधान को जलाया था। वह चुनाव का बहिष्कार करने का आह्वान करता था। आप इस किशनजी को रेड सैल्यूट देंगे...?”
किशनजी एक बड़े माओवादी नेता थे, जिन्हें 2011 में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।
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