गोमती की बाढ़ से लखनऊ के कई इलाके डूबे, घैला गांव का रास्ता भी पानी में समाया

HIGHLIGHTS
- प्लासियो मॉल तक पानी का स्तर बढ़ने की बात सामने आई।
- लखनऊ के कई इलाके करीब एक सप्ताह से जलभराव की चपेट में हैं।
- दुबग्गा की हयात नगर न्यू कॉलोनी से 40 से अधिक परिवारों को सुरक्षित निकाला गया।
गोमती नदी में आई बाढ़ का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को इकाना स्टेडियम में होने वाले मैच से पहले स्टेडियम के आसपास के पानी को रोक दिया गया था। मैच खत्म होने के बाद बुधवार को पानी खोल दिया गया। पानी छोड़े जाने के बाद स्टेडियम के सामने से लेकर प्लासियो मॉल तक जलस्तर लगातार बढ़ने लगा।
दोपहर तक यहां कुछ इंच पानी जमा हुआ था, लेकिन देखते ही देखते जलभराव करीब डेढ़ से दो फीट तक पहुंच गया। सूत्रों के अनुसार, पानी का फ्लो खोलते ही इस इलाके में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। इससे पहले भी करीब एक सप्ताह से लखनऊ के कई इलाके पानी में डूबे हुए हैं। शहर के बीच स्थित मरीन ड्राइव और हनुमंत धाम समेत कई इलाके भी जलमग्न हो चुके हैं।
मैच के बाद पानी भरने पर उठे सवाल
लखनऊ के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इन इलाकों के लोगों का आरोप था कि मैच के कारण पानी रोक दिया गया था, जिसकी वजह से बड़ी मात्रा में जलभराव हुआ।
बुधवार को पानी छोड़े जाने के बाद इकाना स्टेडियम और प्लासियो मॉल के आसपास जलभराव की स्थिति और गंभीर हो गई। गोमती का पूरा पानी छोड़े जाने के बाद इलाके में पानी अचानक बढ़ने को लेकर अभी किसी की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दुबग्गा में 40 से ज्यादा परिवार सुरक्षित निकाले गए
दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड क्षेत्र में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित इलाकों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। हयात नगर न्यू कॉलोनी से बुधवार को 40 से अधिक परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
वहीं, टाड़खेड़ा, सैथा, उमरावखेड़ा, गुलमीखेड़ा, सुखलालखेड़ा और धनसिंहखेड़ा समेत करीब एक दर्जन गांवों के लगभग तीन हजार घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इसके कारण ग्रामीणों को पलायन के साथ-साथ चोरी का डर भी सता रहा है।
जोनल अधिकारी अमरजीत यादव ने बताया कि सूचना मिलते ही नाव के जरिए परिवारों को उनके सामान समेत सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है और उन्हें रैन बसेरों में पहुंचाया जा रहा है।
उमरावखेड़ा में पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। सीएचसी अधीक्षक केडी मिश्रा ने बताया कि बुधवार को अलग-अलग दवाओं की 134 किट वितरित की गईं। तीन दिनों में कुल 807 किट बांटी जा चुकी हैं।
डॉक्टरों की टीम अब तक 257 घरों का सर्वे कर चुकी है। इस दौरान मरीजों की जांच करने के साथ उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। दो गर्भवती महिलाओं को सीएचसी भेजा गया, जिनमें सैथा की एक महिला का सामान्य प्रसव हुआ। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
ग्रामीण विवेक यादव, लवकुश, दिनेश और सुरेश समेत अन्य लोगों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रात के समय गश्त बढ़ाने की मांग की है।
घैला गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में
गोमती का जलस्तर बढ़ने के बाद घैला गांव भी पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ गया है। करीब छह हजार की आबादी वाले इस गांव के चारों तरफ पानी भर गया है। आईआईएम रोड से गांव को जोड़ने वाला एकमात्र रास्ता तीन से चार फीट पानी में डूब गया है, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही रुक गई है।
घरों में पानी घुसने और मवेशियों के लिए चारे व साफ पानी की समस्या पैदा होने के बाद पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर आईआईएम रोड के किनारे पहुंच गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन का ध्यान बाढ़ प्रभावित मामा कॉलोनी, पवन विहार और दाऊदनगर समेत अन्य इलाकों पर ज्यादा है, जबकि घैला गांव की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अभी तक राहत सामग्री, चारा और साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।
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