माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना आठवें दिन भी जारी

प्रवासी ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का धरना माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग स्थित शिविर के सामने लगातार आठवें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में साधु-संत, छात्र और राजनीतिक प्रतिनिधि उनके समर्थन में पहुंचे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र शंकराचार्य के सम्मान में नारेबाजी करते हुए उनके पक्ष में खड़े रहे। छात्रों ने कहा कि शंकराचार्य का अपमान सनातन धर्म का अपमान है।
शहरवासियों को एकजुट करने की पहल
छात्र संघ और पूर्व छात्र नेताओं की पहल पर शहर के नागरिकों को शंकराचार्य के न्याय के पक्ष में एकजुट किया जा रहा है। पूर्व अध्यक्ष श्यामकृष्ण पांडेय ने कहा कि जब सनातन धर्म के सबसे बड़े गुरु के सम्मान को ठेस पहुंचाई गई है, तो शहर के बुद्धिजीवी, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता उनके समर्थन में खड़े हों। पूर्व अध्यक्ष अनुग्रह नारायण सिंह ने कहा कि बटुकों और संन्यासियों पर मारपीट अन्यायपूर्ण है और इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। पूर्व अध्यक्ष केके राय और सपा नेता संदीप यादव ने बताया कि संगम की रेती पर साधु-संतों पर हमला माघ मेले की परंपरा पर चोट है।
शिविर के बाहर नारेबाजी और सुरक्षा की मांग
शनिवार शाम कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने शिविर के बाहर आपत्तिजनक नारेबाजी की। शिविर प्रभारी पंकज पांडेय ने थाना कल्पवासी मेला क्षेत्र में तहरीर देकर सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। सीसीटीवी फुटेज में आरोपियों की नारेबाजी और हंगामे के क्षण दर्ज हैं। एसपी माघ मेला नीरज पांडेय ने कहा कि तहरीर मिलने के बाद मामले की जांच की जाएगी।
कांग्रेस का जन जागरण अभियान
प्रदेश कांग्रेस महासचिव मुकुंद तिवारी ने शंकराचार्य के अपमान के विरोध में जन जागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। प्रत्येक वार्ड में यह अभियान चलाकर लोगों तक संदेश पहुँचाया जाएगा कि प्रशासन और सरकार की कार्रवाई धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ है। प्रदेश महासचिव विवेकानंद पाठक ने कहा कि भाजपा शासन में साधु-संतों की सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं है और राज्यपाल से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की जाएगी।
साधु-संतों की प्रतिक्रिया
संत बिनैका बाबा ने कहा कि अच्छा कार्य करने वालों के खिलाफ उपद्रव फैलाया जाता है। संन्यास लेने के साथ ही व्यक्ति का सम्मान या अपमान मायने नहीं रखता। शृंग्वेरपुर धाम के स्वामी नारायणाचार्य शांडिल्य ने वीआईपी कल्चर का विरोध करते हुए कहा कि सभी संतों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इस विवाद के पीछे सनातन धर्म को निशाना बनाया गया तो संत समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
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