आजम खां की मुश्किलें बढ़ीं, हज समिति की जमीन बिक्री मामले में FIR

HIGHLIGHTS
- शासन ने 3 मई 2024 को मामले की जांच के आदेश दिए थे
- विजिलेंस की जांच इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंपी गई है
- जमीन लखनऊ के ऐशबाग क्षेत्र के कायमखेड़ा (दुगांवा) में स्थित थी
समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अब विजिलेंस ने राज्य हज समिति की जमीन बेचने में गड़बड़ी के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जिस समय जमीन की बिक्री का मामला हुआ, उस दौरान आजम खां राज्य हज समिति के अध्यक्ष थे।
इस मामले में तत्कालीन सचिव लईक अहमद और डॉ. एमएए खान के अलावा आमिश डेवलपर्स के प्रोपराइटर मो. अयूब और मुस्तकीम अहमद को भी आरोपी बनाया गया है। विजिलेंस की जांच में जमीन की बिक्री के चलते समिति को 2.08 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की पुष्टि हुई है।
विजिलेंस के लखनऊ सेक्टर में इंस्पेक्टर ध्रुव चंद्र मौर्य की तहरीर पर दर्ज एफआईआर के अनुसार, राजधानी के ऐशबाग इलाके के कायमखेड़ा (दुगांवा) में खसरा संख्या-117 के तहत हज समिति की करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन थी।
विजिलेंस ने दर्ज की एफआईआर, चार अन्य भी आरोपी
विजिलेंस को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आजम खां और अन्य आरोपियों ने निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। शिकायत के मुताबिक, जमीन की बिक्री में नियमों को नजरअंदाज किया गया।
जांच पूरी होने के बाद विजिलेंस ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की विवेचना इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंपी गई है।
शासन ने तीन मई 2024 को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान सामने आया कि आमिश डेवलपर्स को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जमीन बेचते समय नियमों का पालन नहीं किया गया।
जौहर ट्रस्ट को चंदा देने वाले रामपुर के बिल्डर खालिद से होगी पूछताछ
पूर्व मंत्री आजम खां के करीबी माने जाने वाले बिल्डर और ठेकेदार सैयद खालिद से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूछताछ करने की तैयारी में है। ईडी उन्हें समन भेजकर राजधानी स्थित जोनल कार्यालय में तलब करेगा। सैयद खालिद के जौहर एसोसिएट फर्म से जुड़े होने की बात कही गई है। वह दिल्ली समेत कई शहरों में रिहायशी प्रोजेक्ट के निर्माण का काम करते हैं।
इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक बिल्डर भी ईडी की जांच के दायरे में आ चुके हैं। ईडी ने बीते महीने जौहर ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई बिल्डरों और ठेकेदारों द्वारा ट्रस्ट को चंदा दिए जाने के सुराग मिले थे। रामपुर और दिल्ली के इन लोगों को आजम खां के करीबियों में माना जाता था।
जांच में सामने आया कि बजट की रकम का एक बड़ा हिस्सा ट्रस्ट को चंदे के तौर पर दिया गया।
60 करोड़ रुपये तक पहुंची चंदे की रकम
ईडी की जांच में पता चला कि दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, सहारनपुर, मेरठ और बरेली के कई ठेकेदारों, कारोबारियों और शैक्षणिक संस्थानों ने जौहर ट्रस्ट को चंदा दिया था।
इनमें से कुछ लोगों से ईडी ने दो वर्ष पहले भी पूछताछ की थी। उन्होंने बताया था कि चंदे की रकम का चेक देने के बदले उन्हें नकद राशि दी गई थी। जांच में चंदे के तौर पर 60 करोड़ रुपये की राशि मिलने और कुछ शेल कंपनियों के इस्तेमाल के सुराग सामने आने के बाद मामले की दोबारा पड़ताल की जा रही है।
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