'लिखित माफीनामा और शपथ पत्र', सौरव दास और आशुतोष रांका को शर्तों पर मिली जमानत

HIGHLIGHTS
- एसईएम ऋतु राज ने रिहाई के लिए व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानत बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया।
- दिल्ली पुलिस ने न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी।
- पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका जताते हुए अदालत में दलीलें दीं।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को बुधवार को न्यायिक हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया गया। दोनों को लिखित माफीनामा और शपथ पत्र देने के बाद जमानत पर छोड़ा गया। उन्होंने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष लिखित आश्वासन दिया कि जंतर-मंतर स्थल को कानून के अनुसार गैर-अधिसूचित किए जाने तक वे शांति बनाए रखेंगे और वहां विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे।
एसईएम ऋतु राज ने जंतर-मंतर अतिक्रमण मामले की जांच पूरी होने तक दोनों कार्यकर्ताओं को 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और जमानत बॉन्ड जमा करने के बाद रिहा करने का निर्देश दिया। लिखित आश्वासन में दोनों ने शांति भंग नहीं करने का वादा किया। साथ ही, उन्होंने एसईएम अदालत सहित न्यायपालिका और उसकी सभी संस्थाओं में पूरा विश्वास जताया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन नहीं करने का दिया आश्वासन
अपने बयान में दोनों कार्यकर्ताओं ने शांति, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक जंतर-मंतर को कानून के तहत अधिसूचना से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक वे वहां किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे।
दोनों ने यह भी भरोसा दिलाया कि कोई भी विरोध प्रदर्शन संविधान की सीमाओं के भीतर ही किया जाएगा।
एसईएम अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 135(3) के तहत शांति भंग या सार्वजनिक शांति भंग होने से रोकने के लिए जरूरी तत्काल उपाय लिखित वचनपत्रों के माध्यम से पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किए जा सकते हैं।
दिल्ली पुलिस ने तीन दिन और हिरासत बढ़ाने की मांग की थी
रिहाई का आदेश दिल्ली पुलिस की उस मांग के बाद आया, जिसमें दोनों कार्यकर्ताओं की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की अपील की गई थी। पुलिस ने दलील दी थी कि उनके बाद के बयानों और आचरण को देखते हुए शांति भंग होने और सार्वजनिक शांति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
पुलिस ने यह भी कहा था कि कार्यकर्ताओं ने इसी तरह की गतिविधियों से दूर रहने की इच्छा को लेकर अदालत और मीडिया के सामने विरोधाभासी रुख अपनाया था।
सुनवाई के दौरान कार्यकर्ताओं के वकील ने उस टिप्पणी के लिए अदालत से बिना शर्त माफी मांगी, जो कथित तौर पर पार्टी के एक सदस्य ने उस समय की थी, जब दोनों नेताओं को पहले तिहाड़ जेल ले जाया जा रहा था।
हर सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश
एसईएम अदालत ने दोनों कार्यकर्ताओं को सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहने और अपने बॉन्ड तथा स्वेच्छा से दिए गए आश्वासनों की शर्तों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया।
अदालत ने जांच अधिकारी को अगली सुनवाई के दौरान जमानतदारों के सत्यापन की रिपोर्ट पेश करने को भी कहा। मामले की जांच कानून के अनुसार जारी रहेगी। अगली कार्यवाही शुक्रवार को दोपहर 3 बजे के लिए सूचीबद्ध की गई है।
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