यूपी में मतदाता सूची पर सपा का बड़ा अभियान, हर दिन उजागर करेगी एक खामी

HIGHLIGHTS
- सपा ने मतदाता सूची की खामियां रोजाना उजागर करने का अभियान शुरू किया।
- पार्टी का फोकस डुप्लीकेट मतदाताओं और नए नामों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े पर है।
- सपा ने एसआईआर के बाद एक महीने के विशेष अभियान की जरूरत पर सवाल उठाए।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग के विशेष अभियान के दौरान मतदाता सूची में सामने आने वाली खामियों को रोजाना उजागर करने का फैसला किया है। सोमवार से पार्टी ने इस मुहिम की शुरुआत भी कर दी। पहले चरण में डुप्लीकेट मतदाताओं और नए मतदाताओं के नाम पर कथित फर्जीवाड़े को मुद्दा बनाया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, सपा अब हर दिन मतदाता सूची की एक नई विसंगति को सार्वजनिक करेगी। पार्टी का उद्देश्य पारदर्शी, निष्पक्ष और त्रुटिरहित चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। रोजाना नए मामले या गड़बड़ियां जनता और मीडिया के सामने रखकर सपा जहां सरकार को घेरने की तैयारी में है, वहीं अपने कार्यकर्ताओं को भी इस अभियान में सक्रिय कर रही है।
सपा का कहना है कि हाल ही में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से अनुपस्थित, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके और मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके साथ ही फॉर्म-6 के जरिए नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए हैं। ऐसे में पार्टी को एक महीने के विशेष अभियान की जरूरत समझ में नहीं आ रही है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) भी होना है।
एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के नाम शहर और गांव, दोनों जगह की मतदाता सूचियों में दर्ज थे, उनमें से कई लोगों ने शहर की सूची से अपना नाम कटवा लिया है, जबकि वे अब भी शहर में ही रहते हैं। सपा को आशंका है कि भाजपा दोबारा इन मतदाताओं के नाम शहर की सूची में जुड़वा सकती है, ताकि उसके वोट बैंक पर असर न पड़े। पार्टी का मानना है कि ऐसा होने पर मतदाताओं के नाम दोबारा दो जगह दर्ज हो सकते हैं और एसआईआर प्रक्रिया पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये का उद्देश्य भी पूरा नहीं होगा।
सपा के प्रदेश सचिव केके श्रीवास्तव का कहना है कि इस अभियान के दौरान सत्तापक्ष बड़ी गड़बड़ी कर सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी चुनाव आयोग के कार्यालय में लगातार जाकर भी अपनी बात रखेगी।
आयोग का सॉफ्टवेयर पकड़ेगा वोट की डबलिंग
प्रदेश के अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह के मुताबिक, चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर में डुप्लीकेट नामों और एक से अधिक प्रविष्टियों की पहचान करने की मजबूत व्यवस्था है। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे स्थान की मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत पाया जाता है, तो सॉफ्टवेयर मिलान के आधार पर उसे संभावित डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित कर देता है।
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