SIR के बाद भी मतदाता सूची में जुड़ सकेंगे नाम, सुप्रीम कोर्ट ने कही बड़ी बात

HIGHLIGHTS
- सुप्रीम कोर्ट में केरल, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
- चुनाव आयोग ने यूपी में फॉर्म-7 स्वीकार करने में हुई अनियमितताओं को माना।
- आयोग ने गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो जाने का यह मतलब नहीं है कि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने पर रोक लग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कुछ राज्यों में एसआईआर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया।
केरल, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश में एसआईआर के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रक्रिया पूरी करने की समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया।
ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नाम फिर जुड़ सकेंगे
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नाम दोबारा शामिल किए जा सकते हैं। इससे बड़ी संख्या में लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित होने से बचाया जा सकेगा।
अदालत ने कहा कि एसआईआर के लिए समय-सीमा बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है।
नामांकन दाखिल होने तक नाम जुड़वाने का विकल्प
वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू ने बताया कि एसआईआर पूरा होने के बाद भी मतदाता अपना नाम सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। चुनाव में नामांकन दाखिल होने तक मतदाता सूची में नाम जोड़े जा सकते हैं।
वहीं, चुनाव आयोग ने स्वीकार किया कि उत्तर प्रदेश में अधिकारियों की ओर से बड़ी संख्या में फॉर्म-7 स्वीकार करने में अनियमितताएं हुई थीं।
गड़बड़ी करने वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने बताया कि इन अनियमितताओं को सुधारने के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं। आयोग ने गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के समक्ष इन गड़बड़ियों से जुड़े मुद्दे उठाने की अनुमति दी।
केरल में फरवरी में पूरी हुई थी एसआईआर प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि केरल में एसआईआर का काम फरवरी में पूरा हो चुका था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में इसी मतदाता सूची का इस्तेमाल किया गया था।
वकील जी. प्रकाश के माध्यम से सीपीएम ने दावा किया कि अब भी 24 लाख मतदाता सूची से बाहर हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पार्टी से ऐसे मतदाताओं का विवरण मांगा, जो समय की कमी के कारण अपने फॉर्म जमा नहीं कर सके थे।
अदालत ने यह जानकारी इसलिए मांगी, ताकि चुनाव आयोग इन मामलों की जांच कर सके और जरूरत के मुताबिक सुधारात्मक कदम उठा सके।
चुनाव आयोग को याचिका पर जवाब देने का निर्देश
एक अन्य याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने आरोप लगाया कि केरल में एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। उन्होंने प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद चुनाव आयोग से इस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस याचिका के साथ-साथ राजू रामचंद्रन की ओर से पेश किए गए नोट पर भी जवाब देने का निर्देश दिया है।
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