बस कंडक्टर बने तमिलनाडु के CM विजय, महिलाओं को खुद बांटे फ्री टिकट

HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री विजय बस में यात्रियों के बीच पहुंचे
- महिलाओं को खुद मुफ्त टिकट बांटे
- एक महिला ने मुख्यमंत्री की नजर उतारी
चेन्नई। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय शुक्रवार, 2 सितंबर को एक अलग अंदाज में नजर आए। अपने एक्टिंग करियर में कई किरदार निभा चुके सीएम विजय इस बार असल जिंदगी में बस कंडक्टर की भूमिका में दिखाई दिए।
सीएम विजय ने महिलाओं को बस के टिकट काटकर दिए। इस दौरान बस में मौजूद सभी यात्री काफी खुश नजर आए। एक महिला ने मुख्यमंत्री विजय की नजर उतारी। यह देखकर सीएम विजय ने भी उस महिला की नजर उतार दी।
चेन्नई में फ्री बस यात्रा का विस्तार
सीएम विजय ने शुक्रवार को 'वेत्री पयनम थिट्टम' (Vettri Payanam Thittam) के विस्तार की शुरुआत की। इसके तहत राज्यभर में महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा को और अधिक श्रेणियों तक बढ़ाया गया है।
गांधी जयंती के अवसर पर योजना की शुरुआत करते हुए विजय ने चेन्नई में बस से यात्रा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने यात्रियों से बातचीत की और खुद महिलाओं को मुफ्त टिकट बांटे।
बस में सफर कर रहे कॉलेज के छात्र मुख्यमंत्री के साथ चॉकलेट बांटते हुए भी नजर आए। सीएम विजय के बस कंडक्टर बनने का वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है।
क्या है 'वेत्री पयनम योजना'?
तमिलनाडु सरकार की इस विस्तारित योजना से हर दिन करीब 84.32 लाख महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। लाभार्थी राज्य परिवहन निगमों की 12,695 बसों में मुफ्त यात्रा कर सकते हैं। इनमें एक्सप्रेस और डीलक्स श्रेणी की बसें भी शामिल हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत आय की कोई सीमा नहीं है। साथ ही लाभार्थी एक दिन में कितनी भी बार यात्रा कर सकते हैं और इस पर कोई रोक नहीं है।
सरकार ने इस योजना का नाम अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कझगम' (TVK) से लिया है, जिसका अर्थ "विजयी यात्रा" है। पहले यह योजना केवल कुछ खास श्रेणियों की बसों तक सीमित थी। अब विस्तारित सुविधा में एक्सप्रेस, डीलक्स, मोफुसिल, साधारण और कुछ घाट-क्षेत्र यानी पहाड़ी रास्तों की बस सेवाओं को भी शामिल किया गया है।
परिवहन मंत्री ए. विजय तमिलन पार्थिबन ने योजना को लेकर कहा था कि इसका उद्देश्य महिलाओं और ट्रांसजेंडर लोगों की शिक्षा, रोजगार, आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण में मदद करना है, ताकि परिवहन का खर्च उनकी तरक्की में बाधा न बने।
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