युजवेंद्र चहल ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट से लिया संन्यास, बोले- मेरा सफर अभी खत्म नहीं हुआ

HIGHLIGHTS
- चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए संन्यास का ऐलान किया
- लेग स्पिनर ने करियर में 49 प्रथम श्रेणी मैच खेले
- प्रथम श्रेणी क्रिकेट में चहल के नाम 148 विकेट रहे
भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने शुक्रवार को प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान किया है। चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए खेलने की इच्छा जाहिर की है। चहल पिछले कुछ समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय टीम में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी है।
चहल ने लाल गेंद क्रिकेट को कहा अलविदा
चहल ने लिखा, मैंने पहली क्रिकेट बॉल जो पकड़ी थी, वह लाल रंग की थी। मैं 10 साल का था और उस समय मुझे अंदाजा भी नहीं था कि मुझे इस खेल से कितना गहरा लगाव हो जाएगा। मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ एक और प्रारूप नहीं रहा। इसी फॉर्मेट में मैंने सब्र, मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत और घंटों तक मैदान पर डटे रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने की असली खुशी को समझा।
भारत के लिए कभी नहीं खेला टेस्ट
लेग स्पिनर चहल को भारत की ओर से टेस्ट क्रिकेट खेलने का मौका कभी नहीं मिला। उन्होंने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर नॉर्थम्प्टनशायर के लिए रेड-बॉल प्रारूप में अपना आखिरी मुकाबला खेला।
चहल ने अपने करियर में 49 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें उन्होंने 32.27 की औसत से 148 विकेट हासिल किए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/25 रहा। हाल ही में उन्होंने नॉर्थम्प्टनशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेला और लॉर्ड्स में मिडलसेक्स के खिलाफ अपने आखिरी मैच में दो विकेट लिए।
2026-27 सीजन में 36 वर्षीय चहल ने काउंटी चैंपियनशिप में पांच मैच खेले और 21 विकेट हासिल किए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन डरहम के खिलाफ रहा, जहां उन्होंने कुल नौ विकेट लिए, जिसमें पहली पारी में पांच विकेट भी शामिल थे।
चहल बोले- मेरा सफर खत्म नहीं हुआ
चहल ने आगे लिखा, मैंने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच लॉर्ड्स में खेला। यह कहते हुए भावुकता महसूस होती है, क्योंकि टेस्ट कैप हासिल करना हमेशा से मेरा सपना रहा था, जिसे मैंने कई वर्षों तक संजोकर रखा था। भले ही वह सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन मैं अपने इस सफर से सचमुच संतुष्ट हूं और इस प्रारूप में मिले हर मौके के लिए बेहद शुक्रगुजार हूं।
उन्होंने कहा कि रेड-बॉल क्रिकेट ने उन्हें जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत यादें दी हैं और कोई भी उनसे वे यादें कभी नहीं छीन सकता। हालांकि, उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।
चहल ने कहा, अपने देश के लिए खेलने की भूख अभी भी उनमें जबरदस्त है। उन्हें यकीन है कि उनमें अभी भी क्रिकेट बाकी है और वनडे और टी20 प्रारूप में एक और मौका पाने के लिए वह अपनी पूरी जान लगा देंगे।
उन्होंने हरियाणा क्रिकेट संघ, रणबीर सिंह महिंद्रा सर और श्री अनिरुद्ध सिंह चौधरी सर का खास शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उनके पूरे सफर में लगातार उनका साथ दिया और उन पर भरोसा जताया।
पहली बार रेड बॉल पकड़ने वाले 10 साल के बच्चे से लेकर अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच खेलने तक के सफर को उन्होंने बेहद शानदार बताया।
टेस्ट क्रिकेट में नहीं मिले ज्यादा मौके
चहल भारत के लिए लाल गेंद प्रारूप में नहीं खेले और इस फॉर्मेट में उन्हें ज्यादा मौके भी नहीं मिले। वह भारत की टेस्ट टीम की रणनीति का कभी हिस्सा नहीं रहे। उन्होंने काउंटी क्रिकेट में जरूर अपना प्रदर्शन दिखाया, लेकिन अब वह इस प्रारूप में खेलते नजर नहीं आएंगे।
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