आजम खां की गलतियों की सजा विश्वविद्यालय को न मिले: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी

HIGHLIGHTS
- जौहर विश्वविद्यालय पर संभावित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने विरोध जताया।
- उन्होंने कहा कि आजम खां के मामलों की सजा विश्वविद्यालय और छात्रों को नहीं मिलनी चाहिए।
- मौलाना रजवी ने कार्रवाई की जगह सरकार के नियंत्रण या कंपाउंडिंग जैसे विकल्प सुझाए।
समाजवादी पार्टी नेता आजम खां द्वारा स्थापित जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है। इसी बीच ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने विश्वविद्यालय के समर्थन में बयान जारी किया है।
मौलाना रजवी ने कहा कि रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय उस शख्सियत के नाम पर बनाया गया है, जिसने देश की आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी।
मौलाना मुहम्मद अली जौहर के योगदान का किया जिक्र
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि मौलाना मुहम्मद अली जौहर ने पूरी जिंदगी देश के लिए संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि लंदन में हुई गोलमेज कॉन्फ्रेंस में भारत की आजादी के लिए लगातार 24 घंटे भाषण देने के दौरान उनके दिमाग की नस फट गई थी और वहीं उनका निधन हो गया।
उन्होंने कहा कि मौलाना जौहर ने अपने भाषणों के जरिए ब्रिटिश साम्राज्य के सामने भारत की आजादी की आवाज बुलंद की थी।
मौलाना रजवी ने कहा कि मौलाना मुहम्मद अली जौहर के साथ उनका पूरा परिवार देश के लिए समर्पित रहा। उन्होंने उनके भाई मौलाना शौकत अली का भी जिक्र करते हुए कहा कि वह भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे थे।
उन्होंने कहा कि इतिहास में दोनों भाइयों के योगदान को याद किया जाता है।
आजम खां की गलतियों की सजा विश्वविद्यालय को न देने की अपील
मौलाना बरेलवी ने कहा कि आजम खां ने जो गलतियां की हैं, उसकी सजा वह जेल में भुगत रहे हैं। लेकिन जौहर विश्वविद्यालय एक शिक्षण संस्थान है, जहां हजारों छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन छात्रों में बड़ी संख्या गरीब और कमजोर परिवारों से आने वाले बच्चों की है। ऐसे में विश्वविद्यालय पर कार्रवाई से उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है।
मौलाना रजवी ने उत्तर प्रदेश सरकार और रामपुर प्रशासन से अपील की कि आजम खां के मामलों की सजा विश्वविद्यालय को न दी जाए और बुलडोजर कार्रवाई पर दोबारा विचार किया जाए।
प्रशासन को वैकल्पिक रास्ता अपनाने का सुझाव
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने रामपुर जिला प्रशासन और राजनीतिक लोगों से बातचीत कर एक सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि जिन इमारतों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उन्हें सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है या फिर कंपाउंडिंग और जुर्माने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इमारतों को गिराना उचित समाधान नहीं है और प्रशासन को कोई दूसरा रास्ता तलाशना चाहिए।
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