शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन आज, जानें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र और भोग

HIGHLIGHTS
- मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग और आत्मसंयम की प्रतीक हैं।
- पूजा में सफेद या लाल फूल अर्पित करने की परंपरा है।
- मिश्री, शक्कर और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाया जाता है।
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल 12 अक्टूबर, सोमवार को मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का यह स्वरूप तपस्या, त्याग, साधना और संयम का प्रतीक है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से भक्तों को धैर्य रखने, मन की शांति बनाए रखने और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ रहने की प्रेरणा मिलती है। आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप, पूजा विधि, प्रिय फूल, भोग, मंत्र, शुभ रंग और आरती।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महत्व
मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। देवी का यह रूप तपस्या, पवित्रता, ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है। ‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द का अर्थ ब्रह्म के मार्ग पर चलने और तपस्या करने से जुड़ा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से व्यक्ति को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने, आत्मसंयम बनाए रखने और कठिन परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग
नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में सफेद रंग शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है। इस दिन भक्त मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के दौरान सफेद या पीले रंग के कपड़े पहन सकते हैं।
मां ब्रह्मचारिणी को कौन-से फूल चढ़ाएं?
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में सफेद और लाल फूल चढ़ाने की परंपरा है। भक्त देवी को चमेली, कमल या गुड़हल के फूल अर्पित कर सकते हैं। फूल चढ़ाते समय साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
मां ब्रह्मचारिणी को किस चीज का भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री और शक्कर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा देवी को दूध से बनी मिठाइयां, सफेद बर्फी और खीर भी अर्पित की जा सकती है। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है।
मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र
बीज मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
ध्यान मंत्र:
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
देवी स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए इन चरणों का पालन करें:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा तथा कलश को प्रणाम करके पूजा शुरू करें।
- हाथ में जल और अक्षत लेकर मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
- देवी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं। पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव भी कर सकते हैं।
- मां को कुमकुम, चंदन, अक्षत, हल्दी और सुगंधित इत्र अर्पित करें।
- मां ब्रह्मचारिणी को सफेद या पीले फूल चढ़ाएं।
- श्रद्धापूर्वक देवी के मंत्रों का जाप करें। इच्छानुसार मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।
- मां को मिश्री, शक्कर, खीर या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
- पूजा के अंत में मां ब्रह्मचारिणी की आरती करें और सुख-शांति की प्रार्थना करते हुए अपनी मनोकामनाएं मां के सामने रखें।
मां ब्रह्मचारिणी की आरती
जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
जिसको जपे सकल संसारा॥
जय गायत्री वेद की माता।
जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता॥
कमी कोई रहने न पाए।
कोई भी दुख सहने न पाए॥
उसकी विरति रहे ठिकाने।
जो तेरी महिमा को जाने॥
रुद्राक्ष की माला ले कर।
जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर॥
आलस छोड़ करे गुणगाना।
मां तुम उसको सुख पहुंचाना॥
ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
पूर्ण करो सब मेरे काम॥
भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
रखना लाज मेरी महतारी॥






















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