'अमेरिकी वैज्ञानिक ने वुहान लैब को दी थी कोरोना रिसर्च के लिए फंडिंग', तुलसी गबार्ड का दावा

वुहान लैब और कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। अमेरिका की पूर्व राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने दावा किया है कि कोविड-19 महामारी से जुड़े शोध और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को वित्तीय सहायता देने में पूर्व अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एंथनी फाउची की भूमिका रही थी। गबार्ड ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं, जिनके आधार पर उन्होंने कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
वुहान लैब को फंडिंग देने का दावा
गबार्ड के कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में कहा गया है कि डॉ. फाउची के नेतृत्व वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से वुहान लैब को शोध कार्यों के लिए धन उपलब्ध कराया गया था। आरोप है कि यह फंडिंग चमगादड़ों में पाए जाने वाले कोरोना वायरस पर किए गए तथाकथित "गेन-ऑफ-फंक्शन" अनुसंधान के लिए इस्तेमाल हुई, जिसमें वायरस की क्षमताओं का अध्ययन किया जाता है।
डॉ. फाउची 2022 तक NIAID के प्रमुख रहे और कोविड महामारी के दौरान अमेरिका की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल थे।
लैब-लीक सिद्धांत को दबाने का आरोप
तुलसी गबार्ड ने आरोप लगाया कि महामारी की उत्पत्ति को लेकर लैब-लीक थ्योरी पर उठ रहे सवालों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि कुछ विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की राय को अधिक महत्व दिया गया, जबकि वैकल्पिक दृष्टिकोण रखने वाले विशेषज्ञों की बातों को पर्याप्त जगह नहीं मिली।
उन्होंने यह भी दावा किया कि खुफिया एजेंसियों और वैज्ञानिक समुदाय के बीच साझा की गई कुछ जानकारियों ने कोरोना वायरस की उत्पत्ति को प्राकृतिक बताने वाले निष्कर्षों को बढ़ावा दिया।
कांग्रेस में दिए गए बयानों पर भी उठे सवाल
गबार्ड की ओर से जारी दस्तावेजों में यह आरोप भी लगाया गया है कि डॉ. फाउची ने अमेरिकी कांग्रेस में कोविड-19 की उत्पत्ति और संबंधित एजेंसियों से अपने संपर्कों को लेकर पूरी जानकारी साझा नहीं की। उनके अनुसार, सार्वजनिक सुनवाई के दौरान दिए गए कुछ बयान और उपलब्ध दस्तावेजों में अंतर दिखाई देता है।
हालांकि, इन आरोपों पर डॉ. फाउची की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
व्हिसलब्लोअर्स पर दबाव के भी आरोप
दस्तावेजों में यह दावा किया गया है कि कुछ खुफिया विश्लेषकों और अधिकारियों ने कोविड की उत्पत्ति को लेकर अलग राय रखी थी, लेकिन उनकी चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। गबार्ड का कहना है कि असहमति रखने वाले कुछ अधिकारियों को पेशेवर दबाव का सामना करना पड़ा।
कोविड महामारी ने बदली दुनिया
गौरतलब है कि 2019 के अंत में चीन के वुहान शहर से सामने आए कोरोना वायरस ने कुछ ही महीनों में वैश्विक महामारी का रूप ले लिया था। कोविड-19 के कारण दुनिया भर में करोड़ों लोग संक्रमित हुए और लाखों लोगों की मौत हुई। महामारी के चलते लंबे समय तक लॉकडाउन लागू रहे, उद्योग-धंधे प्रभावित हुए और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
महामारी के दौरान मास्क, सैनिटाइजर, पीपीई किट, ऑक्सीमीटर और वैक्सीन जैसी स्वास्थ्य संबंधी वस्तुओं की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। वहीं कोविड की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिक और राजनीतिक बहस आज भी जारी है, जिसमें प्राकृतिक संक्रमण और लैब-लीक दोनों संभावनाओं पर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी दलीलें देते रहे हैं।
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