नवरात्रि में गरबा को लेकर समिति की अपील, धार्मिक गीतों और भजनों को प्राथमिकता देने की मांग

HIGHLIGHTS
- समिति ने गरबा पंडालों में सुबह और शाम आरती कराने की मांग रखी है।
- आयोजकों से धार्मिक गीतों और भजनों को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।
- प्रवेश से पहले वराह प्रतिमा के पूजन और पंचगव्य देने की व्यवस्था का सुझाव दिया गया है।
नवरात्रि शुरू होने से पहले शहर में होने वाले गरबा आयोजनों को लेकर विवाद शुरू हो गया है। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाव मंच ने गरबा पंडाल संचालकों से आयोजनों में धार्मिक और पारंपरिक स्वरूप बनाए रखने की अपील की है। समिति अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि प्रत्येक गरबा पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाए और सुबह-शाम आरती कराई जाए। इसके बाद धार्मिक गीतों और भजनों के साथ गरबा आयोजन किया जाए।
समिति ने गरबा पंडालों में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर भी अपनी मांग रखी है। चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन कराया जाए। इसके बाद लोगों को पंचगव्य देकर प्रवेश देने की व्यवस्था हो। उनके अनुसार, इससे गरबा आयोजन को धार्मिक स्वरूप देने में मदद मिलेगी।
नवरात्रि में पूजा के साथ गरबा आयोजन की परंपरा
नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है। इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में घट स्थापना, पूजा, आरती और भजन के कार्यक्रम होते हैं। शाम के समय गरबा और डांडिया भी नवरात्रि उत्सव का हिस्सा बन चुके हैं।
गरबा को मूल रूप से देवी की आराधना से जुड़ी लोक परंपरा माना जाता है। इसमें दीप या देवी के प्रतीक के चारों ओर समूह में नृत्य किया जाता है। समय के साथ शहरों में गरबा के बड़े सार्वजनिक आयोजन होने लगे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इसी कारण आयोजनों की सुरक्षा, प्रवेश व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं के पालन को लेकर अलग-अलग संगठन अपनी मांगें रखते रहे हैं।
पंडाल में मां दुर्गा की प्रतिमा और आरती की मांग
चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि गरबा सिर्फ मनोरंजन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह मां की आराधना से जुड़ा पर्व है। इसलिए गरबा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा विधिवत स्थापित की जानी चाहिए। उन्होंने आयोजकों से सुबह और शाम मां की आरती कराने की अपील की।
तिवारी के मुताबिक, आरती के बाद धार्मिक गीतों और भजनों पर गरबा कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पूरे आयोजन में नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रवेश द्वार पर वराह अवतार की प्रतिमा की अपील
हिंदू उत्सव समिति ने गरबा पंडालों के प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वराह अवतार की प्रतिमा स्थापित करने की भी अपील की है। तिवारी ने कहा कि वराह भगवान विष्णु का अवतार है, जिसमें उन्होंने पृथ्वी को अपने दांतों पर उठाया था।
उन्होंने प्रवेश से पहले वराह प्रतिमा का पूजन कराने और उसके बाद लोगों को पंचगव्य देने की व्यवस्था करने की बात कही। पंचगव्य में गाय का दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र शामिल होते हैं।
गरबा में अश्लीलता और फूहड़ता पर रोक की मांग
समिति ने गरबा आयोजनों में गीत-संगीत और नृत्य को लेकर भी अपनी बात रखी है। चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि नवरात्रि मां की आराधना का पर्व है, इसलिए गरबा पारंपरिक तरीके से आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोजन में किसी तरह की अश्लीलता या फूहड़ता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने गरबा आयोजकों से धार्मिक गीतों और भजनों को प्राथमिकता देने की अपील की। साथ ही पूरे आयोजन का माहौल नवरात्रि की परंपराओं के अनुरूप रखने की बात कही।
नियमों का पालन नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी
हिंदू उत्सव समिति ने गरबा आयोजकों से इन व्यवस्थाओं को अपनाने की अपील के साथ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाए और नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप को बनाए रखा जाए। ऐसा नहीं होने पर समिति अपनी ओर से कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगी।
नवरात्रि के दौरान शहर में बड़ी संख्या में सार्वजनिक गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में आयोजनों से पहले समिति की मांगों के बाद गरबा पंडालों की व्यवस्था और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है पंचगव्य?
पंचगव्य को परंपरागत रूप से गाय से प्राप्त पांच पदार्थों का मिश्रण माना जाता है। इसमें दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र शामिल होते हैं। धार्मिक परंपराओं में इसका इस्तेमाल शुद्धीकरण और पूजा से जुड़े अनुष्ठानों में किया जाता है।























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