नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के घोंडा क्षेत्र में रेड कैटेगरी की अवैध औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हाल ही में हुई संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट में पुलिस और अधिकारियों के सहयोग न करने और रिपोर्ट पर हस्ताक्षर न होने को गंभीरता से लिया है।
कार्रवाई न होने पर एनजीटी का सवाल
एनजीटी ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के डीसीपी को अगली सुनवाई में उपस्थित होने और यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि पर्याप्त पुलिस सुरक्षा क्यों नहीं प्रदान की गई और संयुक्त समिति औद्योगिक इकाइयों पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाई। अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
अधिकारियों को ईमानदारी से काम करने के निर्देश
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि इन अवैध औद्योगिक गतिविधियों के कारण पर्यावरण नियमों का उल्लंघन हो रहा है, जिससे पानी और हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है मामला
एनजीटी के समक्ष दायर याचिका में घोंडा गांव में रेड कैटेगरी उद्योगों के अवैध संचालन की शिकायत की गई थी। इसके बाद प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), पूर्वी दिल्ली नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम को निरीक्षण का आदेश दिया गया था।
स्थानीय विरोध और कार्रवाई में बाधा
हालांकि, निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध किया और कई फैक्ट्रियों के ताले नहीं खोलने दिए। पुलिस कर्मियों ने भी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया। टीम ने बताया कि कई इकाइयों की जांच पूरी तरह से नहीं हो सकी क्योंकि पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि महिलाओं को आगे करके विरोध कराया गया, जिससे निरीक्षण प्रक्रिया बाधित हुई।