शिवपुरी के नरवर किले से 400 साल पुरानी तोप चोरी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

HIGHLIGHTS
- शिवपुरी के नरवर किले से 16वीं सदी की करीब 400 साल पुरानी तोप चोरी हो गई।
- बदमाशों ने चोरी से 12 दिन पहले रेकी की थी और बाद में लोडिंग वाहन के साथ वारदात को अंजाम दिया।
- चोरी हुई तोप की अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
शिवपुरी का नरवर किला, जो भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की राजधानी और राजा नल-दमयंती की कथाओं से जुड़ा हुआ है, अब ऐतिहासिक धरोहर की चोरी का गवाह बन गया है। 15-16 जुलाई की रात हथियारों से लैस बदमाशों ने किले की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए 16वीं सदी की एक कीमती तोप चोरी कर ली। करीब 400 साल पुरानी बताई जा रही इस तोप को लेकर हैरानी की बात यह है कि बदमाशों ने वारदात से 12 दिन पहले ही इसकी तैयारी शुरू कर दी थी।
आधी रात में हथियारबंद बदमाश किले में घुसे
किले में तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन अभी भी उस रात की घटना को याद कर सहमे हुए हैं। उन्होंने बताया कि आधी रात के समय करीब 25-30 लोग अचानक किले के पीछे वाले रास्ते से अंदर दाखिल हुए। सभी के पास हथियार थे। सुरक्षाकर्मियों के पास बचाव के लिए सिर्फ एक लाठी थी और टॉर्च तक उपलब्ध नहीं थी।
सुरक्षाकर्मी के अनुसार, बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और जान से मारने की धमकी दी। किसी तरह उनकी जान बची।
5 जुलाई को ही कर ली थी चोरी की तैयारी
पुलिस जांच में सामने आया है कि बदमाश 5 जुलाई को पहली बार नरवर किले पहुंचे थे। वे ओपन कचहरी तक गए, जहां सिंधिया काल की 14 तोपें रखी हुई थीं। बदमाशों ने एक तोप को हटाने की कोशिश की और उसे नीचे गिरा दिया, लेकिन वजन अधिक होने के कारण वे उसे लेकर नहीं जा सके।
इसके बाद 15-16 जुलाई की रात बदमाश पूरी तैयारी के साथ वापस आए। इस बार उनके साथ लोडिंग वाहन भी थे। किले के पीछे के कठिन रास्ते पर मिले गहरे टायरों के निशान भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों की कीमत
16 जुलाई की सुबह केयरटेकर ने थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, ये तोपें सिर्फ लोहे की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि पीतल, तांबा, कांसा और अष्टधातु जैसे मिश्रण से तैयार की गई हैं। इन पर फारसी और देवनागरी भाषा में राजचिह्न भी बने हुए हैं।
हालांकि इनका आधिकारिक मूल्य तय नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में 16वीं सदी की ऐसी तोपों की कीमत 2 से 5 करोड़ रुपये तक बताई जाती है। लंदन और न्यूयॉर्क के अवैध नीलामी बाजारों में इनकी मांग होने के कारण पुलिस अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है।
14 तोपों में से अब बचीं 13
घटना के बाद एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। नरवर पहुंचकर पूछताछ की जाएगी और किसी बड़े गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने भी किले का निरीक्षण करने की बात कही है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और तोप बरामद करने के लिए पुलिस पर दबाव बनाए जाने की बात कही।
कभी अजेय माने जाने वाले नरवर किले की सुरक्षा व्यवस्था पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। आज स्थिति यह है कि किले में तैनात गार्ड बिना टॉर्च और हथियारों के ड्यूटी कर रहे हैं। 14 ऐतिहासिक तोपों में से अब सिर्फ 13 बची हैं।
सवाल उठ रहा है कि जब 5 जुलाई को ही तोप हटाने की कोशिश की गई थी, तब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता क्यों नहीं बरती गई? अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो किले की अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी खतरे में पड़ सकती हैं।
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