इंडिगो के बाद अब एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने दिया इस्तीफा

भारतीय वायुसेवा उद्योग में नेतृत्व परिवर्तन का दौर तेज हो गया है। एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जो उनके पांच साल के अनुबंध की अवधि से पहले आया है। उनके इस्तीफे की पुष्टि एयरलाइन ने मंगलवार को की और कहा कि उत्तराधिकारी चुनने के लिए एक समिति का गठन कर दिया गया है।
विल्सन को 2022 में CEO के रूप में नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल जुलाई 2027 तक होना था। इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन परिचालन चुनौतियों, वित्तीय दबाव और हाल की सुरक्षा घटनाओं से जूझ रही है। इसमें पश्चिम एशिया से जुड़े हवाई प्रतिबंध और विमानों की आपूर्ति से संबंधित परेशानियां शामिल हैं।
इस्तीफे की प्रक्रिया पिछले हफ्ते बोर्ड बैठक में मंजूर हुई। हालांकि, जब तक नया CEO नियुक्त नहीं होता, विल्सन पद पर बने रहेंगे।
कार्यकाल में सबसे बड़ी चुनौती
विल्सन के कार्यकाल में सबसे गंभीर हादसा 12 जून 2025 को हुआ, जब अहमदाबाद में एअर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर (फ्लाइट AI-171) दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इस हादसे में 241 यात्रियों की मौत हुई थी। दुर्घटना के बाद से ही उनके पद से इस्तीफे की चर्चा चल रही थी।
CEO के योगदान की सराहना
विल्सन ने एयरलाइन के निजीकरण के बाद चार वर्षों में चार एयरलाइनों का सफल अधिग्रहण और विलय किया। उनके नेतृत्व में संगठन ने निजी क्षेत्र की कार्यप्रणालियों को अपनाया, बेड़े में 100 नए विमान शामिल किए गए और विमानन सेवाओं के मानक बढ़ाए गए। इसके साथ ही पुराने नैरो-बॉडी विमानों का नवीनीकरण पूरा हुआ और नए डिजाइन वाले वाइड-बॉडी विमानों की डिलीवरी शुरू हो गई।
एयरलाइन के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने विल्सन के योगदान को सराहा और कहा कि कोविड के बाद आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने संगठन को स्थिर रखा।
विल्सन ने कर्मचारियों को निजी ईमेल के जरिए भी इस्तीफे और अपने अनुभव के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जब तक उनका उत्तराधिकारी पदभार ग्रहण नहीं करता, वे CEO और MD के रूप में कार्यरत रहेंगे।
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