इजरायल चुनाव में अरब पार्टियों का दबदबा, सरकार गठन में बन सकती हैं निर्णायक

HIGHLIGHTS
- जॉइंट लिस्ट को करीब 12 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
- राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने गठबंधन सरकार में शामिल होने की इच्छा जताई।
- आइजेनकोट ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था।
यरुशलम। मंगलवार को हुए चुनाव में भारी मतदान के बाद इजरायल की अरब पार्टियां संसद में रिकॉर्ड सीटें हासिल करती नजर आ रही हैं। ऐसे में सरकार गठन के दौरान उनकी भूमिका निर्णायक हो सकती है और वे ‘किंगमेकर’ बनकर उभर सकती हैं।
मतगणना के रुझानों के मुताबिक, दो प्रमुख अरब पार्टियों को करीब 19 सीटें मिलने की संभावना है। यह इजरायली संसद नेसेट में उनकी मौजूदा सीटों की संख्या से लगभग दोगुना है। इन पार्टियों में यूसुफ जबरीन के नेतृत्व वाली जॉइंट लिस्ट और मंसूर अब्बास की राम (Ra'am) पार्टी शामिल हैं।
जॉइंट लिस्ट ने क्या कहा?
अरब बहुल जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन ने कहा कि उनकी पार्टी संभावित रूप से मिलने वाली 12 सीटों का इस्तेमाल नेतन्याहू सरकार को हटाने और इजरायल की राजनीतिक स्थिति में बदलाव लाने के लिए करेगी।
जबरीन के मुताबिक, उनकी पार्टी आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं हो सकती, क्योंकि उन्होंने गाजा में इजरायली सैन्य अभियान और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे का समर्थन किया था। हालांकि, उन्होंने विश्वास मत में सरकार को टिकाए रखने के लिए बाहर से आइजेनकोट के गुट को समर्थन देने की संभावना से इनकार नहीं किया।
अरब शहर उम्म अल-फहम स्थित अपने घर से बात करते हुए जबरीन ने कहा, "हमारे पास अपने समुदाय की सुरक्षा, उनके अधिकारों को आगे बढ़ाने और उनके लिए समानता को बढ़ावा देने की मांगें हैं।"
राम पार्टी का क्या है रुख?
मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली दूसरी प्रमुख अरब पार्टी राम ने खुद को गठबंधन के लिए एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश की है। इसके तहत पार्टी ने अपनी सूची में एक पूर्व यहूदी पुलिस अधिकारी को शामिल किया है। अब्बास ने कहा है कि उनकी पार्टी आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के लिए तैयार है।
मंगलवार रात मतदान समाप्त होने के बाद इजरायली टेलीविजन से बातचीत में अब्बास ने कहा, "मुझे विश्वास है कि हम मुश्किलों से पार पा सकते हैं... और मुझे लगता है कि (आइजेनकोट) गुट के ज्यादातर मतदाता राअम पार्टी के साथ सरकार बनते देखना चाहते हैं।"
उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले आइजेनकोट गुट के वरिष्ठ सदस्यों ने उनके साथ संभावित समझौते को लेकर बातचीत की थी। अब्बास ने कहा, "सिर्फ चेंज ब्लॉक ही नहीं, बल्कि हर कोई हमसे बात कर रहा है। कुछ दिन पहले दक्षिणपंथी खेमे के एक बहुत ही वरिष्ठ सदस्य ने मुझसे संपर्क किया था।"
हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान आइजेनकोट ने किसी भी अरब पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना को खारिज कर दिया था। उन्होंने इसके पीछे साझा मूल्यों की कमी का हवाला दिया, जिसमें इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में मान्यता देना भी शामिल है।
नेतन्याहू की पार्टी का क्या रुख है?
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह सरकार बनाने के लिए किसी भी अरब पार्टी से बातचीत नहीं करेगी। यरुशलम स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रवक्ता गाइ लेवी ने कहा, "ऐसा होने का कोई सवाल ही नहीं है। यह तो ऐसा सवाल है जिसे पूछा ही नहीं जाना चाहिए।"
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने अरब पार्टियों पर देश के चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया है। नेतन्याहू ने भी अरब पार्टियों पर इसी तरह के आरोप लगाए।
कौन हैं मंसूर अब्बास?
मंसूर अब्बास 52 वर्षीय अरब-इजरायली राजनेता, दंत चिकित्सक और राम पार्टी के नेता हैं। 2019 में नेसेट के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने व्यावहारिक राजनीति और घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे अरब राजनीति को एक नई दिशा मिली।
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को बातचीत की मुख्य शर्त बनाने के बजाय, अब्बास अरब नागरिकों को मिलने वाले नागरिक लाभों को प्राथमिकता देते हैं। उनका ध्यान अपराध, सामाजिक-आर्थिक असमानता, बुनियादी ढांचे और नगरपालिका फंडिंग जैसे मुद्दों पर रहता है।
वह 2021 से 2022 के बीच इजरायल की सत्ताधारी गठबंधन सरकार का भी हिस्सा रहे हैं।
क्या है जॉइंट लिस्ट?
जॉइंट लिस्ट इजरायल में अरब बहुल पार्टियों का गठबंधन है। इसका गठन 2015 में अरब नागरिकों के वोटों को एकजुट करने के उद्देश्य से किया गया था। इसमें अहमद तिबी की ताल (Ta'al) पार्टी शामिल है। इस गठबंधन में ऐतिहासिक रूप से हदाश (Hadash) जैसी धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रवादी और वामपंथी विचारधारा वाली पार्टियां भी रही हैं।
जॉइंट लिस्ट नागरिक समानता, अरब समुदायों में अपराध पर रोक और कब्जे को समाप्त करने जैसे मुद्दों को उठाती है। गठबंधन ने सरकारों में सीधे शामिल होने के बजाय उन्हें बाहर से समर्थन देने का रास्ता अपनाया है।
इजरायल में अरब नागरिकों की स्थिति
इजरायल में अरब नागरिक देश की कुल आबादी का करीब 20 प्रतिशत हैं और उनकी संख्या लगभग 21 लाख है। इनमें से कई लोग खुद को अरब-इजरायली या इजरायल में रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिक बताते हैं। देश के चिकित्सा क्षेत्र में भी अरब समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इजरायल के स्वास्थ्य मंत्रालय और टॉब सेंटर फॉर सोशल पॉलिसी स्टडीज के आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डॉक्टरों में 20 प्रतिशत से अधिक, नर्सों में लगभग एक-चौथाई और लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्टों में करीब आधे अरब समुदाय से हैं।
अरब समुदाय के दो नागरिक सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा, अरब इंजीनियर, विद्वान, लेखक और खिलाड़ी भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं।
अरब पार्टियों का सरकारों को समर्थन देने का इतिहास
कई दशकों तक अरब पार्टियां इजरायल की सरकारों को बाहर से समर्थन देती रही हैं। कैबिनेट में उनका प्रतिनिधित्व मुख्य रूप से कुछ व्यक्तिगत नियुक्तियों तक सीमित रहा। इनमें 2001 में ड्रूज समुदाय के सांसद सलाह तारीफ, 2007 में लेबर पार्टी के रालेब मजादेले और बाद के वर्षों में इसावी फ्रेज तथा अयूब कारा शामिल रहे।
साल 2021 में इस स्थिति में बड़ा बदलाव आया, जब मंसूर अब्बास की इस्लामी पार्टी राम ने नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल होने का फैसला किया।
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