बागपत डबल मर्डर का खुलासा: चाय में 15 नशीली गोलियां, जहर का इंजेक्शन; दोनों को जिंदा दफनाया
By Hitesh — August 14, 2026

HIGHLIGHTS
- 25 जुलाई को लहचौड़ा गांव के श्रीगणेश मंदिर परिसर में वारदात को अंजाम देने का आरोप है।
- पुलिस के अनुसार, दोनों युवकों को चाय में नशीली गोलियां मिलाकर बेहोश किया गया।
- दोनों को जहर के इंजेक्शन लगाने के बाद मंदिर परिसर में गड्ढा खोदकर दफनाने की बात सामने आई।
Author: — Dainik Dehat
यूपी के बागपत जिले के लहचौड़ा गांव स्थित श्रीगणेश मंदिर परिसर में 25 जुलाई को हुए दोहरे हत्याकांड की घटना को पूरी तरह योजना बनाकर अंजाम दिया गया। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी उज्ज्वल निवासी पूरनपुर नवादा ने घटना की पूरी जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, उज्ज्वल ने बताया कि मंदिर में साधु नरेशनाथ ने चाय में नशीली गोलियां मिलवाई थीं। इसके बाद अंकित प्रजापति और उसके दोस्त इसरार को चाय पिलाकर बेहोश किया गया। नरेशनाथ ने दोनों को जहर के इंजेक्शन लगाए। इसके बाद सफाई करने के बहाने लहचौड़ा गांव के एक व्यक्ति से फावड़ा मंगवाया गया। नरेशनाथ, उज्ज्वल और कृष्ण यादव ने मिलकर गड्ढा खोदा और दोनों को जिंदा उसमें दबा दिया। एक नाबालिग बाहर पहरेदारी करता रहा।
बहन के साथ संबंधों को लेकर अंकित से नाराज था साधु
एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार, उज्ज्वल ने पूछताछ में बताया कि बहन के साथ अनैतिक संबंधों की जानकारी होने के बाद अंकित प्रजापति साधु नरेशनाथ से नाराज रहता था। अंकित और इसरार सट्टे के नंबर लेने के लिए लगातार साधु के पास आते थे।
अंकित दो-तीन हजार रुपये का सट्टा लगाता था, जबकि साधु नरेशनाथ उससे लाखों रुपये का सट्टा लगाने की बात कहता था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ था।
इसके बावजूद अंकित सट्टे के नंबरों के लिए साधु के पास आता रहता था। अंकित अपनी बहन को साधु के यहां जाते देखता था और इसका विरोध करते हुए झगड़ा करता था। घर में होने वाले झगड़े की जानकारी नरेशनाथ को मिल जाती थी। पुलिस के अनुसार, रोजाना होने वाले विवाद के कारण नरेशनाथ ने अंकित को मारने की योजना बनाई।
पहले से लाकर रखी थीं नशीली गोलियां और जहर के इंजेक्शन
पुलिस के अनुसार, नरेशनाथ ने पहले ही नशीली दवाई और जहर के इंजेक्शन लाकर रख लिए थे। 25 जुलाई को उसने फोन करके अंकित को मंदिर बुलाया। अंकित दिव्यांग था और मदद के लिए इसरार को साथ रखता था तथा उसे खर्च के लिए रुपये देता था। इसी वजह से इसरार भी उसके साथ मंदिर पहुंचा।
उस समय सिंगौली तगा गांव का एक व्यक्ति भी मंदिर में बैठा था। उसके वहां से जाने के बाद नरेशनाथ के कहने पर उज्ज्वल चाय बनाने गया। नरेशनाथ ने अपनी जेब से नशे की 15 गोलियां निकालकर दोनों की चाय में मिला दीं। पुलिस को मंदिर परिसर से नशीली गोलियों का पत्ता भी मिला है।
चाय पीने के बाद अंकित और इसरार बेहोश हो गए। इसके बाद नरेशनाथ ने कार में रखे जहर के इंजेक्शन दोनों को लगाए। पहले दोनों को नहर में फेंकने की योजना थी, लेकिन किसी के देख लेने के डर से मंदिर परिसर में ही दफनाने का फैसला किया गया।
चार फीट गहरा गड्ढा खोदकर दोनों को दफनाया
मंदिर परिसर की सफाई के लिए लहचौड़ा गांव के एक व्यक्ति को फोन कर फावड़ा मंगवाया गया। इसके बाद मंदिर का गेट बंद कर ताला लगा दिया गया और उसके सामने साधु ने अपनी कार खड़ी कर दी। बाहर से आने वाले लोगों पर नजर रखने के लिए नाबालिग को पहरेदारी पर खड़ा किया गया।
इसके बाद नरेशनाथ, उज्ज्वल और कृष्ण यादव ने बारी-बारी से गड्ढा खोदना शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद करीब चार फीट गहरा, दस फीट लंबा और तीन फीट चौड़ा गड्ढा खोदा गया।
उज्ज्वल ने पुलिस को बताया कि जब अंकित और इसरार को गड्ढे में डाला गया, तब तक दोनों की सांस चल रही थी।
नरेशनाथ की पत्नी के पास फोन आने से पकड़ा गया उज्ज्वल
एसपी के अनुसार, नरेशनाथ लगातार पुलिस को चकमा देता रहा। अंकित की बहन और परिवार के लोग भी पुलिस से उसे परिवार का सदस्य बताकर छोड़ने के लिए कहते थे। नरेशनाथ पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख रहा था।
उसे लगा कि पुलिस सख्ती दिखाकर उससे पूरी घटना उगलवा सकती है। इसके बाद वह आठ अगस्त को कार लेकर फरार हो गया।
लहचौड़ा गांव में उसकी पत्नी एक मकान में रहती है। पुलिस ने उसका मोबाइल भी सर्विलांस पर लगा रखा था। बुधवार शाम उसके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया। पुलिस ने नंबर को ट्रेस किया और उज्ज्वल को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने पूरी घटना का खुलासा किया।
एटीएम से रुपये निकालने पर पुलिस हुई थी उलझन में
अंकित का एटीएम घर में रखा था। उसके लापता होने के बाद उसकी बहन ने उसी एटीएम से तीन बार रुपये निकाले। खाते की जानकारी देखने पर पुलिस को लगा कि अंकित खुद रुपये निकाल रहा है।
इसके बाद एटीएम से रुपये निकाले जाने की सीसीटीवी फुटेज निकलवाई गई। इसमें अंकित की बहन रुपये निकालती दिखाई दी। इसके बाद पुलिस ने जांच की दूसरी दिशा में काम शुरू किया।
मोबाइल लोकेशन से भी पुलिस को चकमा देता रहा नरेशनाथ
नरेशनाथ ने पुलिस को मोबाइल लोकेशन के जरिए भी गुमराह किया। उसने अपना मोबाइल मंदिर में रख दिया और अंकित व इसरार के मोबाइल लेकर कभी खेकड़ा, कभी रटौल और बड़ागांव घूमता रहा।
वह कुछ समय के लिए मोबाइल चालू करता और फिर बंद कर देता था। इससे पुलिस को लगा कि वह खुद घूम रहे हैं। इस वजह से पुलिस कई दिनों तक उलझी रही।
खाली सिरिंज तलाशने में जुटी पुलिस
दोहरे हत्याकांड का खुलासा होने के बाद पुलिस ने श्रीगणेश मंदिर परिसर को सीज कर दिया। पुलिस ने अंकित और इसरार को लगाए गए जहर के इंजेक्शन की खाली सिरिंज और नशीली गोलियों की तलाश की।
साधु नरेशनाथ के कमरे से नशीली गोलियों का पत्ता मिला, जिसमें 15 गोलियां बची हुई थीं। जहर के इंजेक्शन की खाली सिरिंज तलाशने के लिए पुलिसकर्मियों ने मंदिर परिसर में लगे डस्टबिन के साथ दीवार के पीछे पड़े कूड़े के ढेर को भी खंगाला।
श्मशान घाट में मुर्गे की बलि देने का ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीण सुरेंद्र कुमार ने बताया कि साधु की हरकतें ठीक नहीं थीं। गांव के लोगों ने साधु को रात में श्मशान घाट में मुर्गे की बलि देते हुए भी देखा था। इसके अलावा मंदिर परिसर में जगह-जगह तंत्र क्रिया करने के निशान भी बने हुए हैं। इसे लेकर ग्रामीणों में साधु के प्रति रोष था।
शादी के झांसे में साधु के संपर्क में आया था उज्ज्वल
पूरनपुर नवादा गांव का रहने वाला उज्ज्वल अपने पिता मनोज का इकलौता बेटा है और मोहननगर की एक कंपनी में काम करता था। परिवार में उसकी दो बहनें हैं। शादी नहीं होने को लेकर वह परेशान रहता था।
करीब एक महीने पहले पूरनपुर नवादा गांव का एक व्यक्ति उसे शादी कराने का झांसा देकर साधु नरेशनाथ के पास लेकर गया था। उज्ज्वल के अनुसार, साधु ने उसकी शादी कराने की जिम्मेदारी ली थी।
पहले साधु ने एक लाख रुपये मांगे। उज्ज्वल ने रुपये देने के लिए हामी भर दी थी। बाद में साधु ने रुपये लेने के बजाय उससे एक काम करने के लिए कहा। कुछ दिन बाद साधु ने अंकित को रास्ते से हटाने के बदले उसकी शादी कराने की जिम्मेदारी ली। शादी के झांसे में आकर उज्ज्वल पूरी योजना में शामिल हो गया। उज्ज्वल ने पुलिस को बताया कि साधु ने अंकित की हत्या की योजना पहले से बना रखी थी।
अंकित के घर पुट्टी कर रहा था इसरार
शेखर ने बताया कि अंकित और इसरार पिछले पांच-छह साल से दोस्त थे और अक्सर साथ रहते थे। पिछले कई दिनों से इसरार अपने दोस्त अंकित के घर की दीवारों पर पुताई और पुट्टी का काम कर रहा था।
25 जुलाई को अंकित के साथ जाने के लिए इसरार बाइक लेकर अपने घर से निकला था। उसकी पत्नी से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह थोड़ी देर में वापस आने वाला है। इसरार के परिवार में एक बेटी और दो बेटे हैं।
पांच बहनों का इकलौता भाई था अंकित
शेखर ने बताया कि करीब छह साल पहले खेत में गेहूं निकालने वाली मशीन पलटने से अंकित उसके नीचे दब गया था। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो गया और इसके बाद उसके दोनों पैरों ने काम करना बंद कर दिया।
अंकित घर से ऑनलाइन कंप्यूटर पर काम करता था। वह अपने परिवार में पांच बहनों का इकलौता भाई था। उसके परिवार में बहन ज्योति, ललिता, अलका, विकासा और भावना हैं।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.



















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.