महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज, उद्धव ठाकरे ने बुलाई अहम बैठक

मुंबई में राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से प्रस्तावित मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। चर्चा है कि इस घटनाक्रम का असर शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार गुट की एनसीपी (एसपी) पर भी पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को होने वाली इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र के कई सांसद अपने भविष्य को लेकर नई रणनीति अपना सकते हैं।
यूबीटी में अंदरूनी हलचल तेज
तृणमूल में असंतोष की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) ने भी अपने सांसदों की अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक ‘मातोश्री’ में पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में होगी, जहां वे सांसदों से सीधे बातचीत कर उनकी राय और स्थिति को समझेंगे।
पार्टी खेमे में यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ सांसद संगठन से दूरी बना सकते हैं, जिससे नेतृत्व सतर्क हो गया है।
‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यूबीटी के कुछ सांसद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। इस कथित राजनीतिक हलचल को कुछ लोग ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि हाल ही में दिल्ली दौरे के दौरान कुछ सांसदों की शिंदे से मुलाकात की भी खबरें सामने आई थीं, जिसने अटकलों को और हवा दे दी है।
सांसदों की नाराजगी और भविष्य की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के कुछ सांसद अपने राजनीतिक भविष्य और क्षेत्रीय विकास को लेकर असंतुष्ट हैं। माना जा रहा है कि वे सत्ता पक्ष के करीब जाकर अपने क्षेत्रों के कामकाज को गति देना चाहते हैं।
हालांकि पार्टी के भीतर अभी तक किसी भी बड़े टूट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एनसीपी (एसपी) में भी असंतोष की चर्चा
इसी बीच शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) को लेकर भी अटकलें तेज हैं। पार्टी के कुछ सांसदों के रुख को लेकर अंदरूनी चर्चाएं जारी हैं।
हाल के दिनों में पार्टी के संभावित भविष्य और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई तरह की बातें सामने आई हैं, जिन पर अभी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट बयान नहीं आया है।
राजनीतिक समीकरण बदलने के संकेत
महाराष्ट्र की राजनीति में मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में कई दलों के भीतर फेरबदल देखने को मिल सकता है। सांसदों और विधायकों का रुख आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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