कर्नाटक में वाल्मीकि निगम घोटाले पर सियासत तेज, आर. अशोक ने कांग्रेस पर साधा निशाना

HIGHLIGHTS
- आर. अशोक ने चंद्रशेखर के परिवार की न्याय की मांग का जिक्र किया
- सुसाइड नोट के बाद कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया था
- अशोक ने मृतक अधिकारी और उनके परिवार को लेकर सवाल उठाए
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने कांग्रेस के उन आरोपों पर पलटवार किया है, जिनमें कहा गया था कि भाजपा दलित नेता और योजना एवं सांख्यिकी विभाग के पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को निशाना बना रही है। अशोक ने सवाल उठाया कि कथित अनियमितताओं के मामले में आत्महत्या करने वाले दलित अधिकारी को क्या न्याय नहीं मिलना चाहिए था।
आर. अशोक ने क्या कहा?
बंगलूरू में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक ने कहा कि अधिकारी चंद्रशेखर का परिवार न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर है। उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस नेता नागेंद्र के साथ कथित अन्याय को लेकर चिंता जता रहे हैं, लेकिन मृतक अधिकारी और उनके परिवार की स्थिति को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है।
अशोक ने कहा, 'कांग्रेस के मुताबिक, दलित मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए, जबकि चंद्रशेखर जैसे दलित अधिकारी की आत्महत्या से मौत हो सकती है। चंद्रशेखर एक ईमानदार अधिकारी थे।'
अशोक ने लगाए क्या आरोप?
चंद्रशेखर की आत्महत्या के बाद मिले सुसाइड नोट से अनियमितताओं का मामला सामने आया था। अशोक ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर ने मौत से पहले जिन लोगों के नाम लिए थे, उनमें कई दलित थे। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस न्याय को तभी महत्व देती है, जब आरोपी आर्थिक रूप से संपन्न हो।
'क्या बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें यही सिखाया था?'
अशोक ने कहा, 'कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, मृतक दलित और उनके परिवार को न्याय की जरूरत नहीं है, लेकिन मंत्री नागेंद्र को न्याय चाहिए, जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए। दलितों के लिए यह कैसा न्याय है। अगर कोई दलित गरीब है तो उसे न्याय नहीं मिलना चाहिए, लेकिन अगर वह अमीर है तो उसे न्याय मिलना चाहिए। क्या बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें यही सिखाया था?'
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम मामले का उल्लेख करते हुए अशोक ने कहा कि भाजपा और जेडी(एस) ने विधानसभा सत्र के दौरान यह मुद्दा उठाया था और विधायकों के समर्थन से इसे तार्किक अंजाम तक पहुंचाया था।
उन्होंने याद किया कि जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने यह मुद्दा उठाया था और विधानसभा में करीब ढाई घंटे तक अपनी बात रखी थी। अशोक के अनुसार, सिद्धारमैया ने उस समय सदन में कहा था कि इसमें शामिल रकम 187 करोड़ रुपये नहीं, बल्कि 84 करोड़ रुपये थी।
अशोक ने क्या दावा किया?
अशोक ने कहा, 'मैं नागेंद्र से पूछना चाहता हूं कि क्या उनकी पार्टी ने उन्हें दलितों के लिए रखे गए पैसे को लूटने के लिए कहा था।' उन्होंने दावा किया कि नागेंद्र का नाम कई चार्जशीट में आया है। अशोक के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मामले में नागेंद्र की भूमिका का पता चला है और उन्होंने राज्य सरकार की ओर से बनाई गई एसआईटी पर घोटाले को दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
भाजपा विधायक रेड्डी ने नागेंद्र की आलोचना क्यों की?
भाजपा विधायक रेड्डी ने इस मामले में नागेंद्र की टिप्पणियों पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर नागेंद्र को लगता है कि वह निर्दोष हैं, तो केवल यह कहने के बजाय कि उनका नाम शामिल नहीं था, उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत पेश करने चाहिए।
रेड्डी ने कहा कि ईडी के कड़े नियम हैं और कोई भी उस पर प्रभाव नहीं डाल सकता। उनके मुताबिक, अगर ईडी के पास सबूत हैं तो वह मामले में आगे कार्रवाई करेगी।
शुक्रवार को योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने कैबिनेट से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि वाल्मीकि आदिवासी कल्याण निगम घोटाले से जुड़े विवाद के कारण कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को शर्मिंदगी न उठानी पड़े, इसलिए वह पद छोड़ रहे हैं। उन्होंने भाजपा पर दलितों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.






















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.