उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर का विवाद गहराया, रात में प्रतिमा की स्कैनिंग करने पहुंची टीम

HIGHLIGHTS
- एसडीएम एलएन गर्ग समेत अधिकारियों की टीम करीब डेढ़ घंटे तक मौके पर रही।
- स्कैनिंग के जरिए प्रतिमा के आधार की गहराई और नीचे की संरचना का पता लगाने की कोशिश की गई।
- समाजसेवी संतोष व्यास ने जांच के दौरान कुछ उपकरणों की बैटरी अचानक डिस्चार्ज होने का दावा किया।
उज्जैन: कंठाल चौराहे से छत्री चौक रोड के चौड़ीकरण के लिए हटाए गए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। आठ फीट ऊंची प्राचीन प्रतिमा पिछले 55 दिनों से टेंट के नीचे विराजमान है। इस बीच सोमवार देर शाम प्रशासनिक टीम विशेष मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ मंदिर पहुंची और प्रतिमा की स्कैनिंग शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि एसडीएम एलएन गर्ग समेत अधिकारियों की टीम करीब डेढ़ घंटे तक मौके पर रही। स्कैनिंग के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि प्रतिमा का आधार जमीन के भीतर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे की संरचना कैसी है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन प्रतिमा को टंकी चौक के पास बने नए मंदिर में स्थानांतरित करने की योजना बना रहा है।
जांच के दौरान मशीनों की बैटरी डिस्चार्ज होने का दावा
समाजसेवी संतोष व्यास ने जांच के दौरान चमत्कार जैसा नजारा सामने आने का दावा किया। उनके मुताबिक, कुछ स्थानों पर उपकरण लगाते ही उनकी बैटरी अचानक डिस्चार्ज हो गई। इसके बाद अधिकारियों को मशीनों को दोबारा चार्ज करना पड़ा। टीम इसके बाद बिना कोई आधिकारिक बयान दिए वहां से लौट गई।
व्यास ने सवाल उठाया कि प्रशासन रात के अंधेरे में बिना सार्वजनिक सूचना दिए गुपचुप तरीके से जांच क्यों कर रहा है। उनका कहना है कि यदि जांच जरूरी थी, तो इसे दिन में पारदर्शी तरीके से पुजारी और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि रात में इस तरह की कार्रवाई से भक्तों के बीच भ्रम और आक्रोश पैदा हो रहा है।
व्यास के अनुसार, स्कैनिंग की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज अधिकारियों से ले लिए गए हैं, ताकि बाद में अधिकारी अपने बयान से पीछे न हट सकें।
भक्तों का सवाल- रामलला भव्य मंदिर में, उनके दूत टेंट में
खड़े हनुमान मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रभु श्रीराम टेंट से निकलकर अयोध्या के भव्य मंदिर में विराजमान हो गए, लेकिन उनके दूत रामभक्त हनुमान को मंदिर से हटाकर टेंट में रखा गया है।
इस मामले में अब तक 45 हजार हस्ताक्षर जुटाए जा चुके हैं। इसके अलावा 50 समाज, 150 पंचायतों और व्यापारियों की ओर से 450 आवेदन दिए गए हैं। सभी की मांग है कि खड़े हनुमान को उसी स्थान पर रहने दिया जाए, जहां वे पहले से विराजमान हैं।
रोजाना हजारों श्रद्धालु कर रहे दर्शन
मंदिर के पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर मंदिर की ख्याति फैलने के बाद देशभर से रोजाना 5 से 10 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि मंदिर को हटाने की कार्रवाई 30 अगस्त को शुरू हुई थी। विरोध के बाद 1 सितंबर को 16 घंटे तक चली कार्रवाई में मंदिर का शिखर और ऊपरी हिस्सा हटाया गया। इसके बाद 4 सितंबर को मुख्य ढांचा भी हटा दिया गया। तब से प्राचीन प्रतिमा टेंट के नीचे ही विराजमान है।
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