मरीज की रिपोर्ट को लेकर विवाद, महिला रेजिडेंट डॉक्टर से अभद्रता के बाद डॉक्टर गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- घटना राजकोट सिविल अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में हुई।
- महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने मरीज की जांच रिपोर्ट दिखाकर भर्ती की बात कही थी।
- आरोप है कि इसी दौरान मेडिकल अधिकारी ने डॉक्टर के साथ मारपीट की।
अहमदाबाद। राजकोट के सरकारी अस्पताल के मेडिकल अधिकारी डॉ. अश्विन रामाणी पर एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर को मरीज की रिपोर्ट को लेकर थप्पड़ मारने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने पीड़ित डॉक्टर से फोन पर बात की और त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद डॉ. रामाणी को गिरफ्तार कर लिया गया।
राजकोट सिविल अस्पताल के मेडिकल अधिकारी डॉ. अश्विन रामाणी आपातकालीन वार्ड में बैठे थे। इसी दौरान रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. कृष्णा शिंगाला ने एक महिला मरीज की जांच रिपोर्ट दिखाते हुए उसे आपातकालीन वार्ड में भर्ती करने की बात कही। आरोप है कि डॉ. रामाणी इस बात पर भड़क गए और डॉ. शिंगाला को थप्पड़ मार दिया।
इसके बाद अभद्र व्यवहार करते हुए उन्होंने कहा कि यहां तुम्हारे बाप का राज नहीं चलता है। मामले में आरोपी मेडिकल अधिकारी डॉ. रामाणी के खिलाफ प्रद्युम्न पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2), 353 और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
स्वास्थ्य अधिकारी गिरफ्तार
घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य मंत्री पानसेरिया ने पीड़ित डॉक्टर से फोन पर बात की और उनके परिजनों को दोषी मेडिकल अधिकारी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया।
इसके बाद उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि महिला डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार की घटना को सरकार ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि महिला चिकित्सकों के गौरव और सम्मान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
उधर, सिविल अस्पताल के सभी रेजिडेंट डॉक्टरों ने अस्पताल के बाहर धरना देकर दिनभर हड़ताल कर विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. रामाणी का व्यवहार काफी अभद्र रहता है और वह सभी के साथ इस तरह का मनमाना व्यवहार करते हैं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही सूरत में रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या ने अपने वरिष्ठ चिकित्सकों के खराब व्यवहार और वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर की रैगिंग से परेशान होकर हॉस्टल में ही आत्महत्या कर ली थी।
आरोपी तीन डॉक्टरों को छह माह के लिए निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद राजकोट में हुई यह घटना गुजरात के स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
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