उबालने पर भी नहीं खत्म होता ज़हर, नेस्ले ने शिशु फार्मूला बाजार से हटाया

विश्व की अग्रणी खाद्य एवं पेय कंपनी नेस्ले ने एहतियातन अपने कुछ शिशु आहार उत्पादों को बाजार से हटाने का फैसला किया है। खाद्य सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं के चलते यह कदम उठाया गया है। कंपनी के अनुसार, उसके ‘एसएमए शिशु फार्मूला’ के कुछ सीमित बैचों में एक संभावित हानिकारक तत्व पाए जाने की संभावना जताई गई है।
ब्रिटेन और आयरलैंड में लागू हुआ रिकॉल
नेस्ले ने सोमवार देर रात जारी बयान में बताया कि वह यूनाइटेड किंगडम और आयरलैंड में बिक्री के लिए उपलब्ध एसएमए इन्फेंट फार्मूला और फॉलो-ऑन फार्मूला के चुनिंदा बैच वापस मंगा रही है। इस प्रक्रिया में ब्रिटेन की फूड स्टैंडर्ड्स एजेंसी (FSA) भी शामिल है। दोनों संस्थाओं ने मिलकर उन बैच नंबरों की पहचान कर सार्वजनिक सूची जारी की है, जिनका उपयोग शिशुओं के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
सेरेउलाइड नामक टॉक्सिन की आशंका
जानकारी के मुताबिक, रिकॉल का कारण उत्पादों में ‘सेरेउलाइड’ नामक विषैले तत्व की संभावित मौजूदगी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह टॉक्सिन शिशुओं के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। इसके संपर्क में आने पर उल्टी, मतली और पेट में तीव्र दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
उच्च तापमान से भी निष्क्रिय नहीं होता टॉक्सिन
खाद्य मानक एजेंसी ने चेताया है कि सेरेउलाइड की सबसे चिंताजनक विशेषता इसका अत्यधिक ताप प्रतिरोधी होना है। एजेंसी के अनुसार, दूध तैयार करते समय इस्तेमाल किया जाने वाला उबलता पानी या सामान्य पकाने की प्रक्रिया भी इस विषैले पदार्थ को खत्म नहीं कर पाती। ऐसे में इसके सेवन से बीमारी के लक्षण तेजी से उभर सकते हैं।
नेस्ले का बयान: एहतियातन उठाया गया कदम
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह रिकॉल पूरी तरह स्वैच्छिक है और इसे कड़े गुणवत्ता मानकों के तहत ‘अत्यधिक सावधानी’ बरतते हुए लागू किया गया है। नेस्ले ने यह भी बताया कि अब तक इन उत्पादों के कारण किसी शिशु के बीमार पड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
अभिभावकों के लिए दिशा-निर्देश
नेस्ले ने प्रभावित बैच खरीदने वाले माता-पिता से अपील की है कि वे इन उत्पादों का उपयोग तुरंत बंद करें। कंपनी ने ब्रिटेन और आयरलैंड में ग्राहकों की सहायता के लिए अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और पूर्ण धनवापसी का आश्वासन दिया है। यह मामला शिशु आहार क्षेत्र में सख्त गुणवत्ता नियंत्रण की अहमियत को फिर से उजागर करता है, जहां मामूली लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बन सकती है।
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