हरियाणा: 700 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की कार्रवाई, चार और आरोपित गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- 700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में चार और गिरफ्तारियां हुईं।
- सीबीआई के अनुसार, गौरव कांसल ने करीब 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाने में भूमिका निभाई।
- कालका नगर परिषद के खाते से 18.46 करोड़ रुपये निकाले जाने का मामला जांच में है।
हरियाणा के विभिन्न विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी से जुड़े 700 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने सोमवार को चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए लोगों में सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल के अलावा सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं।
चारों आरोपितों को पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया गया।
सीबीआई के मुताबिक, गौरव कांसल ने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को नकदी में बदलने और फिर उसे बैंक खातों में जमा कराने में अहम भूमिका निभाई। एजेंसी का आरोप है कि दो साल के दौरान उसने आईडीएफसी बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और मामले के कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि के साथ मिलकर 94 करोड़ रुपये ठिकाने लगाए।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपित एक गिरोह की तरह काम कर रहे थे। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि धोखाधड़ी की रकम किन लोगों तक पहुंची और उससे कहां-कहां संपत्तियां खरीदी गईं।
सीबीआई के अनुसार, 6 दिसंबर 2023 से 5 दिसंबर 2025 के बीच जाली कंपनियों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से भारत डिस्ट्रिब्यूटर्स के खाते में 82 लेन-देन के जरिए 26.78 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके बदले 66 लेन-देन के माध्यम से 25.18 करोड़ रुपये वापस भेजे गए। एजेंसी का आरोप है कि इन लेन-देन के बदले नकदी भी दी गई।
सरकारी खातों से निकाली गई रकम को सीधे खर्च करने के बजाय कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर नकदी में बदला जाता था, ताकि पैसे के स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
सीबीआई के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया का संचालन रिभव ऋषि के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित कार्यालय से होता था। गौरव कांसल नकदी को बैंकिंग लेन-देन के जरिए बदलने वाले व्यक्ति के तौर पर काम करता था। उसके एक चचेरे भाई की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि गौरव ने 140 से अधिक लेन-देन के जरिए रिभव ऋषि के लिए सरकारी धन ठिकाने लगाया और कैश कन्वर्टर्स तक करीब 94 करोड़ रुपये पहुंचाए।
नगर परिषद कालका के 18 करोड़ रुपये और आईएएस के बेटे तक हवाला का आरोप
इस मामले में 20 जनवरी 2026 को नगर परिषद कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया। इसमें से 4 करोड़ रुपये एसआरआर प्लानिंग गुरुज के आरबीएल बैंक खाते में भेजे गए। इसके बाद उसी दिन इस खाते से 2.50 करोड़ रुपये मेगा स्टोर को ट्रांसफर किए गए।
21 और 22 जनवरी को स्वास्तिक की ओर से 80 लाख रुपये और 1.10 करोड़ रुपये भी भेजे गए। सीबीआई के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को रिभव ऋषि के कहने पर मोहित गोयल ने अपने स्टोर और परिचितों के माध्यम से 2 करोड़ रुपये नकद का इंतजाम किया।
आरोप है कि उसी शाम यह रकम हवाला चैनल के जरिए दिल्ली में आरोपित आईएएस आरके सिंह के बेटे तक पहुंचाई गई। इस तरह, सीबीआई के आरोपों के मुताबिक, कालका नगर परिषद के खाते से निकाली गई सरकारी रकम 48 घंटे के भीतर नकदी के रूप में एक लोकसेवक के बेटे तक पहुंच गई।
सरकारी खजाने से 59.50 करोड़ रुपये के लेन-देन का आरोप
गिरफ्तार आरोपितों में मोहित गोयल भी शामिल है, जो सेक्टर-32डी के एससीओ 357 में संचालित चंडीगढ़ मेगा स्टोर का मालिक है। वह सेक्टर-37बी का निवासी है।
सीबीआई के अनुसार, मोहित गोयल को जानकारी थी कि आरएस ट्रेडर्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज, रिभव ऋषि की फर्में हैं। एजेंसी का कहना है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने ही मोहित के स्टोर का बैंक खाता खुलवाया था।
सीबीआई के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2023 से 28 जनवरी 2026 के बीच आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश और एसआरआर प्लानिंग गुरुज ने मोहित गोयल और उसकी दो फर्मों—चंडीगढ़ मेगा स्टोर तथा भगवती एजेंसीज—को 112 लेन-देन के जरिए कुल 59 करोड़ 50 लाख 47 हजार 515 रुपये भेजे।
इसके बदले मोहित गोयल की ओर से बैंक के माध्यम से केवल 14 करोड़ 5 लाख 24 हजार रुपये ही वापस भेजे गए।
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