हाथरस: शहीद अखिलेश को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई

हाथरस: पोस्टमार्टम के बाद सैन्यकर्मी अखिलेश का पार्थिव शरीर 5 फरवरी की रात गांव पहुंचा। बेटे का शव देखते ही मां बेसुध हो गईं, जबकि पत्नी और परिजन फूट-फूटकर रोते नजर आए। जम्मू से देर रात पहुंचे पिता देवेंद्र भी बेटे की हालत देखकर खुद को संभाल नहीं पाए और परिवार से लिपटकर बिलख पड़े।
अगली सुबह पूरे गांव में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। शोक के साथ-साथ लोगों में आक्रोश भी साफ दिखा। आगरा से आई सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बेहद भावुक माहौल में डेढ़ साल के मासूम बेटे रुद्र ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य ने हर मौजूद व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। बीती रात से बच्चा बार-बार अपने पिता को याद कर मां की गोद में रोता रहा, जिससे परिवार का दर्द और बढ़ गया।
“हथियार होता तो मेरा बेटा अकेले मुकाबला कर लेता”
अखिलेश के पिता देवेंद्र ने कहा कि उनका बेटा बहादुर और चुस्त फौजी था। अगर उसके पास हथियार होता तो वह हमलावरों से खुद ही निपट सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश विवादों से दूर रहना चाहता था, लेकिन कुछ लोग साजिश के तहत उसे परेशान कर रहे थे। जब बात नहीं बनी तो उसे घेरकर मार दिया गया।
परिवार ने की सख्त कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेटे का पढ़-लिखकर सेना में जाना कुछ लोगों को खटक रहा था, इसी कारण उस पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। 2022 में जब अखिलेश जम्मू-कश्मीर में तैनात था, तब भी एक झगड़े के मामले में उसका नाम घसीट दिया गया था।
गांव में भारी पुलिस बल तैनात
समदपुर गांव में घटना के बाद तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। शुक्रवार को सीओ अमित पाठक और कोतवाली प्रभारी योगेश कुमार ने परिजनों से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि नामजद आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
नामजद आरोपी परिवार समेत फरार
हत्या के मामले में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, वे अपने परिवारों सहित घर छोड़कर फरार हो चुके हैं। यहां तक कि उनके पशु भी घरों पर नहीं हैं। परिजनों का कहना है कि आरोपी पहले से बनाई गई योजना के तहत गायब हुए हैं।
सेना के अधिकारी भी पहुंचे गांव
अखिलेश की मौत की सूचना मिलने पर आगरा से सैन्य अधिकारी गांव पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। गोलियों की संख्या और छुट्टी से जुड़े तथ्यों को लेकर कुछ देर असमंजस रहा, लेकिन बाद में पुलिस और डॉक्टरों से बातचीत के बाद स्थिति साफ हुई। स्थानीय विधायक प्रदीप चौधरी भी मौके पर पहुंचे। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
दिल्ली और हरियाणा तक तलाश
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने पांच विशेष टीमें बनाई हैं, जिनमें एसओजी और सर्विलांस यूनिट भी शामिल हैं। टीमें दिल्ली, एनसीआर और हरियाणा के कई इलाकों में दबिश दे रही हैं। अब तक 350 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा चुकी है और आरोपियों के रिश्तेदारों के ठिकानों पर भी छापे मारे जा रहे हैं।
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