बदलती वैश्विक राजनीति में समुद्र बन गया शक्ति संतुलन का केंद्र: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में हालिया घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने शुक्रवार को कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि बदलती वैश्विक राजनीति में समुद्र एक बार फिर दुनिया की शक्ति संतुलन का केंद्र बन चुके हैं। अब भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास और अपनी पूरी क्षमता के साथ समुद्री क्षेत्रों में नेतृत्व निभाए।
पश्चिम एशिया की स्थिति असामान्य
राजनाथ सिंह ने इस क्षेत्र में हालात को असामान्य और चिंताजनक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यहां के तनावपूर्ण हालात दुनिया की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकते हैं। उन्होंने कहा, “इस समय यह कहना मुश्किल है कि घटनाएं किस दिशा में बढ़ेंगी।”
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा पर असर
रक्षा मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत अहम है। किसी भी रुकावट का सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है, साथ ही अन्य सामानों की सप्लाई चेन भी प्रभावित होती है। इन अनिश्चितताओं के कारण वैश्विक व्यापार पर बड़ा दबाव पड़ रहा है।
समुद्रों की रणनीतिक अहमियत
राजनाथ सिंह ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने समुद्रों की महत्वता को फिर से साबित कर दिया है। बदलती वैश्विक राजनीति के इस दौर में समुद्र शक्ति संतुलन के केंद्र में हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक बड़े समुद्री देश के तौर पर भारत को स्पष्ट विजन और निर्णायक भूमिका के साथ आगे आना होगा।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
हालांकि, मंत्री ने श्रीलंका के पास अमेरिकी हमले में ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस डेना’ के डूबने का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया। यह जहाज भारत में आयोजित मिलान नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था। इस हमले में 87 ईरानी नाविक मारे गए, जिससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया।
अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान जाने की खबरें भी आई। इसके जवाब में ईरान ने यूएई, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। पिछले तीन दिनों से दोनों पक्षों के बीच भीषण हमले जारी हैं।
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