Form 6 विवाद पर जयराम रमेश का चुनाव आयोग पर आरोप, CEC ज्ञानेश कुमार से मांगी जवाबदेही

HIGHLIGHTS
- जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर अपनी आपत्तियां सामने रखीं।
- विवाद मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया से जुड़ा है।
- कांग्रेस ने पहली बार वोट देने वाले युवाओं का मुद्दा उठाया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश ने चुनाव आयोग पर मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बदलाव के जरिए पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के सामने कथित तौर पर मुश्किलें पैदा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाबदेही की मांग की।
युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने के चुनाव आयोग के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए रमेश ने आरोप लगाया कि आयोग ने इससे पहले नए मतदाताओं के पंजीकरण को कठिन बनाने के लिए फॉर्म 6 में बदलाव किए थे। उन्होंने इस बदलाव को “पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक” बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर जयराम रमेश ने क्या आरोप लगाए?
रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि देर रात चुनाव आयोग ने अधिकारियों को युवा मतदाताओं के लिए विशेष नामांकन शिविर लगाने और सोशल मीडिया के जरिए इसका व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ने फॉर्म 6 में ऐसा बदलाव किया था, जिससे युवा मतदाताओं को जोड़ना लगभग असंभव हो गया था।
उनका आरोप है कि फॉर्म 6 में एक नया अनिवार्य हिस्सा जोड़ा गया, जिसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि उसके माता-पिता या दादा-दादी पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का हिस्सा थे या नहीं। रमेश के मुताबिक, इससे पहली बार मतदान करने वाले Gen Z मतदाताओं के लिए पंजीकरण में बाधा पैदा हुई।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इस आरोप पर कहा है कि मूल फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के मुताबिक, माता-पिता या दादा-दादी से संबंधित जानकारी के लिए SIR के तहत अलग से Annexure D की घोषणा जोड़ी गई थी।
रमेश ने बदलाव को लेकर कौन सी तीन आपत्तियां गिनाईं?
- उल्लंघन 1: रमेश का आरोप है कि जुलाई 2026 की शुरुआत में ऑनलाइन फॉर्म को बिना किसी आधिकारिक अधिसूचना के बदल दिया गया।
- उल्लंघन 2: उनका दावा है कि चुनाव आयोग के पास फॉर्म 6 में संशोधन करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 के तहत यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
- उल्लंघन 3: रमेश ने कहा कि पंजीकरण नियम, 1960 के तहत बनाए गए नियमों में संशोधन किए बिना फॉर्म में बदलाव किया गया। उनके मुताबिक, ऐसा केवल केंद्र सरकार कर सकती है और इसके लिए संसद को उचित जानकारी देना जरूरी है।
रमेश ने आरोप लगाया कि कानून में तय वैधानिक फॉर्म को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के कहने पर एकतरफा तरीके से बदल दिया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि SIR से संबंधित आदेश और फॉर्म के साथ अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी के साथ लागू की गई थी। आयोग का कहना है कि उसके सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं।
युवाओं की समस्याओं का जिक्र कर क्या बोली कांग्रेस?
रमेश ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने इस “अवैध और अनधिकृत” बदलाव को वापस लेने की मांग की थी, ताकि युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग बिना परेशानी के पंजीकरण करा सकें।
रमेश ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने संवैधानिक परंपराओं और प्रक्रियाओं के साथ-साथ संसद द्वारा बनाए गए कानून का भी जानबूझकर उल्लंघन किया है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाया और सुप्रीम कोर्ट से तत्काल स्वतः संज्ञान लेने की मांग दोहराई।
इस्तीफा देकर स्थिति सुधार सकते हैं ज्ञानेश कुमार: जयराम रमेश
रमेश ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा देकर इस मामले में खुद को गवाह बनाने के रास्ते से अपनी स्थिति सुधार सकते हैं।
कांग्रेस नेता के ये आरोप मतदाता सूची के SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रमेश ने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि आंतरिक टिप्पणियां और सुझाव बहुसदस्यीय संस्था की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, विपक्षी दलों ने भी की आलोचना
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना यूबीटी और वाम दलों समेत विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की आलोचना तेज कर दी है। विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर, असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर समेत कई राज्यों में चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन किए।
असम में असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुवाहाटी के राजीव भवन से विरोध मार्च निकाला। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों तथा मतदाता सूची में किए गए बदलावों की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की।
कांग्रेस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान असम कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
इससे पहले शुक्रवार को जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों पर सरकार पर “क्रूर कार्रवाई” करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं, युवाओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को देश के अलग-अलग हिस्सों में हिरासत में लिया गया।
भाजपा ने आरोपों पर किया पलटवार
भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। पार्टी ने इन्हें चुनावी हार से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग पक्षपाती होता तो विपक्ष केरल जैसे राज्यों में चुनाव नहीं जीतता।
केंद्रीय मंत्री और एनडीए के प्रमुख सहयोगी चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग को जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए आरोपों पर अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए।
पासवान ने कहा कि अगर चुनाव आयोग के खिलाफ इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, तो आयोग और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वह मजबूती से अपना पक्ष रखें।
आरोपों पर चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
चुनाव आयोग ने कहा है कि आंतरिक तकनीकी नोट, लिखित सवाल और सुझाव बहुसदस्यीय संस्था के सामान्य कामकाज का हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, अलग-अलग विचार और टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं, जबकि अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।
फॉर्म 6 को लेकर आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उसके अनुसार, SIR के तहत माता-पिता या दादा-दादी से संबंधित जानकारी के लिए अलग Annexure D जोड़ा गया था। आयोग ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी प्राप्त थी।
SIR और चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज को लेकर चल रहा विवाद 29 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में उठाए जाने की उम्मीद है।
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