वोटिंग अधिकार पर जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की टिप्पणी, बोले- लाखों नागरिकों को वंचित करना मनमानी

HIGHLIGHTS
- जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने रविवार को हैदराबाद में यह टिप्पणी की।
- कार्यक्रम नालसर विधि विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया था।
- उन्होंने संविधान में नागरिकों के दो अलग-अलग वर्ग होने की बात से इनकार किया।
देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और मतदान के अधिकार को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रक्रिया के कारण लाखों भारतीय नागरिकों से मतदान का अधिकार छिन जाता है, तो यह अपने आप में मनमानी है और संविधान की व्यवस्था को नकारने जैसा है।
रविवार को हैदराबाद स्थित नालसर विधि विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में जस्टिस भुइयां ने कहा कि लाखों नागरिकों को उनके ही देश में वोट देने के अधिकार से वंचित कर दोयम दर्जे का नागरिक बनाना किसी भी तर्क के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।
संविधान में नागरिकों के दो वर्ग नहीं हो सकते
जस्टिस भुइयां ने कहा कि भारतीय संविधान नागरिकों के दो अलग-अलग वर्गों की व्यवस्था नहीं करता। उनके मुताबिक, ऐसा नहीं हो सकता कि एक वर्ग को मतदान का अधिकार मिले और दूसरे वर्ग को इससे वंचित कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रक्रिया बड़े स्तर पर नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित करती है, तो वह सांविधानिक प्रावधानों के खिलाफ होगी। उन्होंने ऐसी प्रक्रिया को मनमाना माना।
एसआईआर को लेकर पहले से उठ रहे सवाल
जस्टिस भुइयां की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (एसआईआर) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान एसआईआर से संबंधित फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना फैसले और आदेश जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने दी थी यह प्रतिक्रिया
दो चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों के बीच मतभेद चर्चा और विचार-विमर्श का हिस्सा होते हैं।
आयोग ने यह भी कहा था कि उसके सभी आदेशों को पूरा कानूनी समर्थन प्राप्त है और इन्हें स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किया जाता है।
कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर उठाए सवाल
जस्टिस भुइयां की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जस्टिस भुइयां के बयान का हवाला देते हुए कहा कि इस टिप्पणी से मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार ने संविधान के प्रावधानों और उसकी भावना का उल्लंघन किया है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि अब उनके पास अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
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